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अष्टलक्ष्मी दर्शन : युवा प्रतिभागियों से राज्यपाल ने की बातचीत

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अष्टलक्ष्मी दर्शन : युवा प्रतिभागियों से राज्यपाल ने की बातचीत


गुवाहाटी, 27 मार्च (हि.स.)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने शुक्रवार को लोक भवन में, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) द्वारा प्रायोजित “अष्टलक्ष्मी दर्शन, 2026 युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम” के तहत छत्तीसगढ़ और नई दिल्ली से आए 44 युवा प्रतिभागियों के साथ बातचीत की।

युवा प्रतिभागियों के साथ बातचीत करते हुए, राज्यपाल ने आठ पूर्वोत्तर राज्यों, विशेष रूप से असम की समृद्ध परंपरा और संस्कृति पर विस्तार से चर्चा की। राज्यपाल ने कहा कि भारत की ताकत उसके युवाओं में निहित है, जिनकी ऊर्जा और मूल्य राष्ट्र के भविष्य को आकार दे सकते हैं। राज्यपाल ने युवाओं के बीच राष्ट्रीय एकता, अनुशासन और जिम्मेदारी की प्रबल भावना के महत्व पर जोर दिया। छात्रों को राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, उन्होंने उनसे “राष्ट्र भाव” और “राष्ट्र सेवा” की भावना को अपनाने का आग्रह किया।

राज्यपाल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ऐसे आदान-प्रदान कार्यक्रम सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने और राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवा प्रतिभागियों से अपने अनुभवों को अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने असम को उसकी अद्वितीय सांस्कृतिक, जातीय, भाषाई और धार्मिक विविधता के कारण “मिनी इंडिया” (लघु भारत) की संज्ञा दी।

राज्यपाल ने युवा प्रतिभागियों को एक 'फुलाम गामोछा' और एक प्रेरणादायक पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया।

इससे पहले, दो युवा प्रतिभागियों ने “अष्टलक्ष्मी दर्शन, 2026 युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम” के तहत अपने अनुभव राज्यपाल के साथ साझा किए। उल्लेखनीय है कि आईआईटी, गुवाहाटी ने “अष्टलक्ष्मी दर्शन, 2026 युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम” की मेजबानी की थी। इस 14-दिवसीय कार्यक्रम के दौरान, प्रतिभागियों को पूर्वोत्तर क्षेत्र की विविध सामाजिक-सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और साथ ही पारिस्थितिक समृद्धि से रूबरू कराया गया।--------------------

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय