बिहू, माजुली की वैष्णव संस्कृति और रंगपुर को यूनेस्को मान्यता दिलाने की दिशा में असम सरकार का बड़ा कदम: मुख्यमंत्री
गुवाहाटी, 10 जुलाई (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार बिहू, माजुली की वैष्णव संस्कृति तथा शिवसागर स्थित अहोम राजधानी रंगपुर को यूनेस्को की मान्यता दिलाने के लिए चरणबद्ध तरीके से प्रयास करेगी। यह पहल चराइदेव मैदाम को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने के बाद की जा रही है। विधानसभा सत्र के बाद विधानसभा सभाकक्ष में मुख्यमंत्री आज सदन की कार्यवाही के बाद असम बजट के प्रावधानों को लेकर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार बंगाल में दुर्गा पूजा को यूनेस्को धरोहर बनाया गया है उसी प्रकार असम सरकार बिहू को भी इसी तर्ज पर ले जाने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट में असम की सांस्कृतिक, प्राकृतिक और अमूर्त विरासत के संरक्षण एवं वैश्विक पहचान को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। इसके तहत रंगघर संरक्षण परियोजना को शीघ्र पूरा किया जाएगा तथा करेंग घर के संरक्षण, जीर्णोद्धार और पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
बजट में श्रीमंत शंकरदेव से जुड़े ऐतिहासिक माधुपुर सत्र के समग्र विकास, विरासत संरक्षण, तीर्थयात्री सुविधाओं और सांस्कृतिक अवसंरचना के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई है। साथ ही वैष्णव परंपरा को संस्थागत मजबूती देने के लिए असम सत्र आयोग का गठन किया जाएगा।
राज्य सरकार राष्ट्रीय स्तर पर असम की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई दिल्ली में भव्य बिहू उत्सव का आयोजन करेगी। इसके अलावा अहोम सेनापति लचित बरफूकन और स्वतंत्रता सेनानी शहीद कुशल कोंवर के जीवन पर विश्वस्तरीय फीचर फिल्मों के निर्माण को आर्थिक सहायता दी जाएगी। भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशती समारोह का भव्य समापन भी नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य असम की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, उसकी वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करना तथा राज्य को सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है ।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

