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पुण्यतिथि पर कृष्णकांत हैंडिक को मुख्यमंत्री ने किया याद

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पुण्यतिथि पर कृष्णकांत हैंडिक को मुख्यमंत्री ने किया याद


गुवाहाटी, 07 जून (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने आज पंडितप्रवर डॉ. कृष्णकांत हैंडिक की पुण्यतिथि पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी एक संदेश में कहा है कि असाधारण पांडित्य, ज्ञान की खोज और समाज के लिए किए गए योगदान के चलते पंडितप्रवर डॉ. कृष्णकांत हैंडिक ने असम को एक नई बौद्धिक दिशा दी। शिक्षा के प्रसार, संस्कृति के संरक्षण और साहित्य की संपन्नता के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

उन्होंने कहा है कि असम की शिक्षा, साहित्य और सांस्कृतिक जागृति के एक अद्वितीय मार्गदर्शक हैंडिक की पावन पुण्यतिथि पर हम उन्हें गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनके आदर्श, कर्मनिष्ठा और ज्ञान की रोशनी भविष्य की पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

कृष्णकांत हैंडिक का जन्म असम के जोरहाट जिले के सातघरिया अहोम परिवार में 20 जुलाई, 1898 में हुआ था, जबकि निधन 07 जून, 1982 को हुआ था।। उनके पिता चाय किसान राय बहादुर राधाकांत हैंडिक और माता नारायणी हैंडिक थीं। वे असम के एक लेखक, संस्कृत विद्वान और शिक्षाविद थे। संस्कृत और भाषाविज्ञान के क्षेत्र में उन्होंने अद्वितीय पांडित्य का परिचय दिया। श्रीहर्ष के 'नैषध चरित', सोमदेव के 'यशस्तिलक' आदि ग्रंथों के अनुवाद के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की। नौ साल तक गौहाटी विश्वविद्यालय के उपकुलपति की भूमिका निभाने वाले हैंडिक केवल 39 वर्ष की आयु में 1937 में असम साहित्य सभा की गुवाहाटी सभा के अध्यक्ष भी चुने गए थे।

उल्लेखनीय है कि असम के कई सार्वजनिक आयोजनों के विकास के लिए उदार दान देने के कारण लोगों ने कृतज्ञता स्वरूप राधाकांत हैंडिक को 'दानवीर' की उपाधि से सम्मानित किया। दानवीर राधाकांत हैंडिक के चार बेटों में कृष्णकांत हैंडिक सबसे बड़े थे। उनकी मां नारायणी देवी असम के अन्य एक विद्वान पद्मनथ गोहांई बरुवा की बहन थीं।

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय