प्रद्युत के भाजपा में शामिल होने के बीच उनके पुत्र प्रतीक का गौरव गोगोई ने किया समर्थन
गुवाहाटी, 18 मार्च (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अपीसीसी) के अध्यक्ष गौरव गोगोई द्वारा युवा नेता प्रतीक बोरदोलोई के प्रति अपना समर्थन जताया है। यह घटनाक्रम तब प्रकाश में आया जब प्रतीक के पिता एवं नगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।
गौरव गोगोई ने प्रद्युत बोरदोलोई के पाला बदलने के फैसले को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) लोकसभा चुनावों में उनके साथ खड़ी रही थी और इस बार तो पार्टी ने उनके परिवार के ही एक सदस्य को विधानसभा चुनाव का टिकट भी दिया था। गोगोई ने कहा कि इसके बावजूद, उन्होंने निजी कारणों से पार्टी छोड़ दी। गोगोई ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से प्रतीक बोरदोलोई से संपर्क करेंगे, जो मार्घेरिटा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा मैंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें (प्रतीक) ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। मैं उन्हें फोन करूंगा और उन्हें ही यह तय करने दूंगा कि वे आगे क्या करना चाहते हैं।
गोगोई ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव असम के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस चुनावी मुकाबले को मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व के खिलाफ एक व्यापक लड़ाई के रूप में पेश किया। उन्होंने दावा किया कि समाज के सभी वर्गों, जिनमें महिलाएं, चाय बागान से जुड़े समुदाय और युवा शामिल हैं, के लोग यह नहीं चाहते कि डॉ. सरमा दोबारा मुख्यमंत्री बनें।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि डॉ. सरमा का समर्थन करने का बोरदोलोई का फैसला पूरी तरह से उनकी निजी पसंद है। चुनावी गठबंधनों के विषय पर, गोगोई ने कहा कि उन्होंने 'रायजोर दल' के साथ गठबंधन की संभावना को लेकर अखिल गोगोई से फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि अब अगला कदम उठाना पूरी तरह से उन (अखिल) पर निर्भर करता है।
गोगोई ने हाल के दिनों में प्रद्युत से हुए चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि यह चुनाव किसी व्यक्ति विशेष के बारे में नहीं है, बल्कि यह चुनाव राज्य को आज़ाद कराने के बारे में है, आज़ादी उन चीज़ों से जिन्हें उन्होंने 'भय', 'भ्रष्टाचार' और 'विभाजनकारी राजनीति' के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने भूमि वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि जहां एक ओर कई गरीब लोगों को ज़मीन के पट्टे (स्वामित्व अधिकार) देने से मना कर दिया गया और उन्हें बढ़ते राजस्व बोझ का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर कथित तौर पर एक ही परिवार के कई सदस्यों ने मिलकर हज़ारों बीघा जमीन पर अपना कब्जा जमा रखा है, यह स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री की ओर किया गया परोक्ष इशारा था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अभी भी मज़बूत है, खासकर लखीमपुर जैसे इलाकों में।----------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

