'फुलगुरी धेवा' किसान विद्रोह की वार्षिकी पर मुख्यमंत्री ने शहीदों को किया नमन
गुवाहाटी, 18 अक्टूबर (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने आज 'फुलगुरी धेवा' किसान विद्रोह की वार्षिकी पर शहीद किसानों को याद करते हुए उनको नमन किया है।
सोशल मीडिया फेसबुक पर पोस्ट शेयर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज़ादी के सूरज के उगने से बहुत पहले ही, असम में अन्याय के खिलाफ विरोध की एक प्रबल आग धधक रही थी। अक्टूबर 1861 में, समूचे फुलगुरी क्षेत्र के किसानों ने ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के खिलाफ साहस, एकता और आत्म-सम्मान के साथ विरोध किया।
उन्होंने कहा 'फुलगुरी धेवा' किसान विद्रोह, असम के उन लोगों के अदम्य साहस और न्याय के लिए किए गए संघर्ष का एक गौरवपूर्ण अध्याय है, जिन्होंने अन्याय के आगे घुटने नहीं टेके। फुलगुरी धेवा के प्रत्येक वीर शहीद को सादर नमन।
ज्ञात हो कि फुलगुरी धेवा असम की ब्रह्मपुत्र घाटी का पहला किसान विद्रोह था। विदेशी अंग्रेज सरकार के शोषण के खिलाफ शोषित किसानों द्वारा किया गया असम का पहला विद्रोह। यह विद्रोह 1861 में (18 अक्टूबर) नगांव जिले के कलंग नदी के पास फुलगुरी में हुआ था। फुलगुरी एक तिवा जनसंख्या वाला गांव था, जहां अत्यधिक मात्रा में अफीम की खेती की जाती थी।
इस विद्रोह को फुलगुरी धेवा के नाम से जाना जाता है। अंग्रेज और सिपाहियों ने उस समय विद्रोह को धावा कहा और धावा का अपभ्रंश रूप धेवा बन गया। उचित नेतृत्व के बिना ही जिले के विभिन्न क्षेत्रों से किसान खुद-ब-खुद आकर किया गया यह विद्रोह असम में किसान विद्रोह और आंदोलन की शुरुआत था। 1861 में ब्रिटिश सरकार द्वारा अफीम की खेती पूरी तरह बंद कर दिए जाने पर पूरे तिवा समुदाय के लोग अत्यंत असंतुष्ट हो गए, क्योंकि सरकारी क़ानून लागू नहीं किया गया था। इसके अलावा तांबुल (सुपारी)-पान पर भी कर लगाया जाने की खबर आई थी। जिससे किसानों का आक्रोश फूट पड़ा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

