नगालैंड के सीमावर्ती जंगलों में दो दिन की खोज के बाद असम वन विभाग की लापता टीम मिली सुरक्षित
गुवाहाटी, 26 जुलाई (हि.स.)। असम के वन मंत्री जयंत मल्ल बरुवा ने आज सोशल मीडिया 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए कहा है कि डिमा हसाओ-कार्बी आंगलोंग और पड़ोसी राज्य नगालैंड की सीमा के दूर-दराज़ जंगलों में गश्त के दौरान संपर्क से बाहर हुई असम वन विभाग की 26 सदस्यीय टीम मिल गई है और सुरक्षित है।
इस टीम में लैंगटिंग, मंडेरडिसा, हाथीखोला और माइबोंग वन रेंज के 23 वन अधिकारी और उनके साथ तीन अन्य कर्मचारी शामिल थे। घने जंगल वाले इलाके में गश्त और तलाशी अभियान के दौरान उनका संपर्क अपने मुख्य कार्यालय से टूट गया था, क्योंकि वहां मोबाइल नेटवर्क की सुविधा बहुत कम है।
लगभग दो दिनों तक कोई संपर्क न हो पाने के कारण, वन विभाग, असम पुलिस और ज़िला प्रशासन ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया। इस कोशिश में ड्रोन से निगरानी और भारतीय वन सेवा (आईएफएस) की एक वरिष्ठ टीम की मदद भी ली गई।
इस घटना की जानकारी देते हुए बरुवा ने कहा कि यह उन वन कर्मियों के सामने आने वाली भारी चुनौतियों की याद दिलाता है, जो जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा के लिए राज्य के सबसे दुर्गम और मुश्किल इलाकों में लगातार काम करते हैं।
मंत्री ने सफल तलाशी अभियान में शामिल सभी एजेंसियों को धन्यवाद् दिया और असम के जंगलों की सुरक्षा के लिए वन अधिकारियों के साहस, समर्पण और अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की।
सूत्रों के मुताबिक, यह टीम 23 जुलाई को लैंगटिंग, माइबांग और खेप्रे इलाकों में जंगल की गश्त और सर्वे के लिए निकली थी। इस ग्रुप में दो रेंज ऑफ़िसर, एक असिस्टेंट रेंज ऑफ़िसर और फॉरेस्टर और फ़ॉरेस्ट गार्ड शामिल थे। टीम ने आखिरी बार 24 जुलाई की शाम को विभाग के अधिकारियों से बात की थी। तब से कोई संपर्क नहीं हो पाया; उनके मोबाइल फ़ोन या तो बंद हैं या नेटवर्क कवरेज से बाहर बताए गये थे।
संपर्क टूटने के बाद असम पुलिस, असम राइफ़ल्स और वन विभाग के अधिकारियों ने मिलकर तलाशी अभियान शुरू किया है। तलाशी टीमें लापता कर्मचारियों का पता लगाने के लिए दूर-दराज़ के जंगली इलाकों में छानबीन कर रही थीं। संयोग से रविवार को टीम से संपर्क स्थापित हो गया।
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

