असम में उतरने लगा बाढ़ का पानी, तीन जिलों में फसल हो गई चौपट
गुवाहाटी, 28 जुलाई (हि.स.)। असम में आई बाढ़ का पानी लगातार घट रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की संख्या में भी तेजी से कमी आ रही है। इस बीच बाढ़ से हुए नुकसान ने क्षेत्र की सूरत बदलकर रख दी है। जिन इलाकों में इस बार बाढ़ आई है, सामान्य रूप से ये क्षेत्र बाढ़ प्रभावित नहीं हैं, यही कारण है कि नुकसान अनुमान से कहीं अधिक हुआ है। बाढ़ का मुख्य कारण पड़ोसी राज्य नगालैंड में बादल फटने से अचानक पानी का सैलाब आ गया, जिसके चलते नगालैंड एवं असम के शिवसागर, चराईदेव एवं जोरहाट जिले बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित हो गए। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई है। अब लोग घरों, सड़क, विद्यालयों में पानी के साथ आई मिट्टी की गाद की सफाई में जुटे हुए हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के 27 जुलाई को जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में किसी के निधन की खबर सामने नहीं आई। राज्य में इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है। धनसिरी (नुमालीगढ़) नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सरकार युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव के लिए सभी तरह के उपाय करने में जुटी हुई है। बाढ़ से इस समय छह जिले शिवसागर, गोलाघाट, चराईदेव, जोरहाट, नगांव एवं कामरूप (मेट्रो) प्रभावित हैं। इन जिलों के 21 राजस्व मंडलों के कुल 631 गांव प्रभावित हैं। राज्य की कुल 445495 आबादी एवं 37139.52 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है।
राज्य सरकार ने 90 राहत शिविर एवं 94 राहत वितरण केंद्र समेत कुल 184 शिविर क्रियान्वित रखे हैं। राहत शिविरों में 28695 लोग आश्रय लिए हुए हैं, जबकि राहत वितरण केंद्रों पर 51777 गैर-शिविर निवासी राहत प्राप्त कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित जानवरों की कुल संख्या 256334 दर्ज हुई है।
बाढ़ में राहत एवं बचाव अभियान में एसडीआरएफ, सेना/अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, एयर फोर्स, पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं (एफ एंड ईएस), सर्कल कार्यालय/स्थानीय प्रशासन, नागरिक सुरक्षा/प्रशिक्षित स्वयंसेवक और अग्निशमन विभाग जुटा हुआ है। इस दौरान 67 नावें भी राहत कार्य में जुटी रहीं। नावों के जरिए कुल 59 लोगों के साथ ही 36 पशुओं को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

