राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बाढ़ पीड़ितों के बीच सहायता और बचाव अभियान जारी
- 378 गांवों में 1912 कार्यकर्ताओं ने की 40,168 परिवारों की सहायता
गुवाहाटी, 06 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता उपरी असम के भीषण बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए विभिन्न प्रकार के बचाव और सहायता कार्यक्रम जारी रखे हुए हैं। बाढ़ से प्रभावित शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिलों के हजारों परिवार बेघर हो गए हैं और उन्हें भोजन, स्वच्छ पानी, सुरक्षित आश्रय और आवश्यक चिकित्सा सेवाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे आपदाजनक समय में स्वयंसेवक लगातार प्रभावित क्षेत्रों में सेवा प्रदान कर रहे हैं।
गत 20 जुलाई से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विभिन्न संगठनों के लगभग 1912 स्वयंसेवक बचाव, सहायता, घर निर्माण के साथ-साथ सफाई अभियान जारी रखे हुए हैं। बाढ़ से प्रभावित शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिलों के लगभग 378 गांवों के लगभग 40168 परिवारों को स्वयंसेवकों ने सहायता सामग्री उपलब्ध कराई और विभिन्न प्रकार की मदद पहुंचाई है। हाल की भयंकर बाढ़ की स्थिति में कुछ हद तक शांति आई है, लेकिन शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, लखीमपुर समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों के स्वयंसेवक जो जहां तक संभव हो मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं। यहां तक कि शिवसागर जिले के बेतबारी क्षेत्र के काकती गांव, डी-गांव, 2 नंबर कोंवर गांव, नेपाली खूंटी, बिहुबर और चेतिया कैयर्त गांव आदि क्षेत्रों में स्वयंसेवकों ने एक व्यापक बचाव अभियान चलाकर 200 से अधिक लोगों को बाढ़ के पानी से सुरक्षित स्थान और सहायता शिविर में ले गए।
सुंदर पोखरी, बामुन पोखरी, गेलकी और राजाबाड़ी आदि जलमग्न क्षेत्रों में छोटे नाव की मदद से आबद्ध परिवारों के पास पहुंचकर तैयार भोजन, शुद्ध पीने का पानी, जीवनदायी दवा, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की जा रही है। वहीं, जोरहाट जिले के एलेंगमरा, कातिराम चौक, कुलाय चौक, नालिया चौक, शेनसोआ चौक और चारिघरिया चौक आदि क्षेत्रों में यह सहायता अभियान जारी है। बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच वितरित मुख्य सहायता सामग्रियों में चावल, चीनी, दाल, शिशु आहार, नमक, आलू, पहनने और बिछाने का कपड़ा, बर्तन, तिरपाल, मोमबत्ती, मच्छर भगाने वाला क्वायल, विभिन्न प्रकार का सूखा खाना, बिस्कुट, शुद्ध पीने का पानी, साबुन, फिटकरी, आवश्यक दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल हैं।
वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नेशनल मेडिकोज़ ऑर्गनाइजेशन (एनएमओ) के सहयोग से स्वयंसेवकों ने अब तक 50 से अधिक चिकित्सा शिविर आयोजित कर सेवाएं प्रदान की हैं। उल्लेखनीय है कि अचानक आई बाढ़ के कारण घरों में भरा पानी और मलबा होने के कारण बाढ़ प्रभावित लोग कोई सामान निकाल पाने में असमर्थ थे, इसलिए उन्हें हर तरह की सामग्री की आवश्यकता थी। इस स्थिति में स्वयंसेवक सभी प्रकार की सामग्री बाढ़ प्रभावित लोगों में वितरित कर रहे हैं। प्रारंभिक स्थिति में स्वयंसेवकों ने छोटे नावों से जलभराव वाले घरों में भोजन और पानी पहुंचाने के अलावा वृद्ध, महिलाएं, बच्चे और बीमार लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर आवश्यक चिकित्सा की व्यवस्था भी की है।
वर्तमान में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच स्वयंसेवक न केवल बाढ़ से नुकसान हुए घरों की मरम्मत कर रहे हैं बल्कि विभिन्न तरह से मदद भी कर रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सेवा करने के लिए उपरी असम के कुछ जिलों के स्वयंसेवक बाढ़ प्रभावित इलाकों में मौजूद होकर दिन-रात सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा, विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं के लिए भी भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। दूसरी ओर, ताकि किसान खेतों में फ़सल बो सकें, इसके लिए भी स्वयंसेवक अलग-अलग जगहों पर पर्याप्त सिंचाई और फ़सल बोने की व्यवस्था कर रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विभिन्न संगठनों की इस मानवीय सेवा मुहिम ने संघ की उस शाश्वत परंपरा को दर्शाया है, जिसके लिए आरएसएस को “निःस्वार्थ सेवा के लिए हमेशा तैयार” कहा जाता है। “नर सेवा नारायण सेवा है”—इस महान आदर्श से प्रेरित होकर स्वयंसेवक और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता इस भयानक प्राकृतिक आपदा के समय प्रभावित लोगों के पास मजबूती से खड़े होकर उन्हें आशा, साहस और सहारा दे रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

