home page

शिवसागर एवं चराईदेव जिलाें में भाकिसं ने चलाया राहत, स्वच्छता एवं पुनर्वास अभियान

 | 
शिवसागर एवं चराईदेव जिलाें में भाकिसं ने चलाया राहत, स्वच्छता एवं पुनर्वास अभियान


गुवाहाटी, 11 अगस्त (हि.स.)। उपरी असम के कई जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ से भारी जन-धन की हानि हुई है। खासकर शिवसागर एवं चराईदेव जिले में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने व्यापक स्तर पर जन-धन, कृषि एवं पशुधन को भारी क्षति पहुंचाई है। इस आपदा से 622 गांवों के लगभग 3.32 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें चराईदेव जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 1.42 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए, जबकि उसके बाद शिवसागर का स्थान है। बाढ़ के कारण लगभग 45,342 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई तथा 32,477 लोग विस्थापित होकर 81 सरकारी राहत शिविरों में शरण लेने को विवश हुए। इसके अतिरिक्त 74,000 से अधिक पशुओं की मृत्यु भी हुई है। ऐसी विषम परिस्थिति में भारतीय किसान संघ (भाकिसं) पूर्ण समर्पण के साथ बाढ़ पीड़ितों की सहायता, राहत एवं पुनर्वास कार्यों में निरंतर जुटा हुआ है।

भारतीय किसान संघ के लखीमपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़, धेमाजी, मोरीगांव, नलबाड़ी तथा कामरूप ज़िलों के कार्यकर्ताओं ने राहत सामग्री के वितरण के साथ-साथ 1500 बीघा भूमि में रोपाई हेतु धान की पौध (पैडी सैपलिंग) की व्यवस्था की है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए 5,000 से अधिक विद्यार्थियों के लिए विद्यालयी वर्दी (स्कूल यूनिफॉर्म) उपलब्ध कराई जा रही है।

भाकिसं से जुड़े तीन किसान उत्पादक संगठनों (एफपीसी) ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के उद्देश्य से मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान हेतु ₹3 लाख की राशि एकत्रित की है। जोरहाट ज़िला इकाई द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पारंपरिक हर्बल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों का आयोजन किया गया है। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों एवं घरेलू उपचारों के उपयोग संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

मोरीगांव ज़िले से 50 कार्यकर्ताओं की एक टीम पिछले चार दिनों से शिवसागर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरण के साथ-साथ पीड़ित परिवारों के घरों के पुनर्निर्माण, स्वच्छता अभियान तथा अन्य पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रूप से लगी हुई है। बाढ़ से प्रभावित पशुओं के लिए एक ट्रक पशु चारे की व्यवस्था भी की जा रही है।

बरपेटा एवं बंगाईगांव ज़िलों की इकाइयां बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास हेतु मशरूम उत्पादन, पशुपालन तथा अन्य आजीविका आधारित स्वरोज़गार योजनाओं पर कार्य कर रही हैं। जलस्तर कम होते ही कार्यकर्ता इन योजनाओं को धरातल पर लागू करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय होंगे।

भाकिसं का लक्ष्य विभिन्न राहत, पुनर्वास एवं आजीविका संवर्धन कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 5,000 बाढ़ प्रभावित परिवारों तक पहुंचना तथा उन्हें पुनः आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग प्रदान करना है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय