असम विधानसभा चुनाव : जालुकबारी सबसे चर्चित सीट, हिमंत की अजेय जीत का सिलसिला बरकरार
गुवाहाटी, 26 फरवरी (हि.स.)। असम की सोलहवीं विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही राज्यभर में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। परिसीमन के बाद पहली बार हो रहे इस चुनाव में 126 विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं में व्यापक बदलाव हुआ है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण और चर्चित सीट है जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र, जो एक बार फिर राजनीतिक दृष्टि से चर्चा केंद्र में है।
कामरूप (मेट्रो) जिले के अंतर्गत आने वाली 37 नंबर जालुकबारी विधानसभा सीट का नया स्वरूप परिसीमन के बाद सामने आया है। इस सीट से वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा लगातार पांच बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। जालुकबारी में ग्राम पंचायतों के साथ-साथ गुवाहाटी नगर निगम के कई वार्ड शामिल हैं। इसमें वार्ड नंबर 1 का गाड़ीगांव और जालुकबारी, वार्ड नंबर 2 का पदुमबाड़ी, गुवाहाटी विश्वविद्यालय और सुंदरबाड़ी, वार्ड 3 से 9 तक के पांडु, मालीगांव और गौशाला के बड़े हिस्से, वार्ड नंबर 10 के बोरागांव का कुछ भाग तथा वार्ड नंबर 13 के फटाशिल का हिस्सा शामिल किया गया है। इसके अलावा रानी विकास खंड और उत्तर गुवाहाटी नगर क्षेत्र भी इस विधानसभा क्षेत्र में जोड़े गए हैं। पूर्व में वार्ड 13 पश्चिम गुवाहाटी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत था।
आगामी चुनाव के लिए जारी प्रारूप मतदाता सूची के अनुसार जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,10,624 मतदाता हैं। इनमें 1,00,407 पुरुष मतदाता, 1,10,209 महिला मतदाता तथा 8 तृतीय लिंग मतदाता शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि यहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। मतदान केंद्रों की संख्या भी 222 से बढ़ाकर 247 कर दी गई है।
यदि चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो जालुकबारी सीट का प्रतिनिधित्व विभिन्न दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने किया है। 1967 में शैलेन मेधी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। 1972 में कांग्रेस के रेवती दास, 1978 में जनता पार्टी के लक्ष्यधर चौधरी और 1983 में कांग्रेस के शाह जलाल अली विधायक बने। 1985 में भृगु कुमार फूकन निर्दलीय रूप में तथा 1991 और 1996 में असम गण परिषद के प्रत्याशी के तौर पर निर्वाचित हुए।
वर्ष 2001 से जालुकबारी की राजनीति का केंद्र डॉ. हिमंत बिस्व सरमा रहे हैं। उन्होंने 2001, 2006 और 2011 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद 2016 और 2021 में भी उन्होंने इस सीट पर विजय हासिल की। 1996 में भृगु कुमार फूकन से पराजित होने के बाद 2001 में डॉ. सरमा ने वापसी की और तब से उनकी जीत का सिलसिला लगातार जारी है। जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र में उनका प्रभाव अब भी अटूट माना जाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

