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कृषि और सिंचाई मंत्री पीयूष हजारिका ने की डिमा हसाओ में विभागीय कार्यों की समीक्षा

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कृषि और सिंचाई मंत्री पीयूष हजारिका ने की डिमा हसाओ में विभागीय कार्यों की समीक्षा


-ऑयल पाम और बागवानी के विस्तार, बेहतर सिंचाई सुविधाओं और किसानों की मदद पर ज़ोर

डिमा हसाओ (असम), 12 अक्टूबर (हि.स.)। कृषि और सिंचाई मंत्री पीयूष हजारिका ने आज डिमा हसाओ जिला मुख्यालय शहर हाफलॉन्ग में डिमा हसाओ स्वायत्त परिषद के कॉन्फ्रेंस हॉल में एक बैठक के दौरान ज़िले में कृषि और सिंचाई विभागों के चल रहे कार्यों और विकास पहलों की समीक्षा की। बैठक में ज़िले की कृषि और बागवानी क्षमता, सिंचाई बुनियादी ढांचे और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई।

डिमा हसाओ में ऑयल पाम की खेती की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने बताया कि चालू वर्ष के दौरान लगभग 4,193 हेक्टेयर ज़मीन की पहचान की गई है और उसे ऑयल पाम की खेती के तहत लाया गया है। उन्होंने खेती के और विस्तार के साथ-साथ बागवानी पर अधिक ज़ोर देने का आह्वान किया, जिसमें केला, सेव, बेर, अदरक, ड्रैगन फ्रूट और अनानास शामिल हैं। पांच से सात लाख पौधों के प्रस्तावित वितरण पर भी चर्चा की गई, जिसमें मंत्री ने अधिकारियों को लाभार्थियों की सही पहचान और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

सिंचाई बुनियादी ढांचे की समीक्षा करते हुए, बैठक में बताया गया कि वर्तमान में 84 सिंचाई योजनाएं चल रही हैं, जो लगभग 3,170 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करती हैं, जबकि लगभग 12,000 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता तैयार की गई है। मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं (ईएपी) में पहाड़ी ज़िले में सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने पर अधिक ज़ोर दिया जाएगा। उन्होंने दोनों विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी ज़ोर दिया और पात्र किसानों से अपने पीएम-किसान पंजीकरण और रिकॉर्ड को अपडेट रखने का आग्रह किया। ज़िले में लगभग 22,000 किसान इस योजना के लाभार्थी हैं।

बाद में, मंत्री ने चांदपुर नगर, कालाचंद में चल रही सिंचाई योजना का दौरा किया, जो 12 गांवों में 300 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को कवर करती है। डिमा हसाओ स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य देबोलाल गार्लोसा और वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ, उन्होंने योजना के कामकाज का निरीक्षण किया और इसकी उपयोगिता का आकलन किया। ज़िले की कृषि क्षमता को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने विभागीय इंजीनियरों को उपयुक्त स्थानों पर बड़ी सिंचाई परियोजनाओं की व्यवहार्यता की जांच करने का निर्देश दिया। मंत्री ने 'हाडिंगमा गुंजुंग फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी' (एफपीसी) का भी दौरा किया। इस कंपनी से लगभग 500 किसान जुड़े हैं जो अदरक, हल्दी, केला, सुपारी, अनानास, पपीता और दूसरी फसलें उगाते हैं। उन्होंने बताया कि यह कंपनी अगले साल तक भारत की पहली ऐसी एफपीसी बन जाएगी जिसे 'डेमीटर सर्टिफिकेशन' मिलेगा। यह एक बड़ी उपलब्धि होगी जिससे टिकाऊ और बायो-डायनामिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एफपीसी को मज़बूत करने, बाज़ार तक पहुंच बेहतर बनाने और किसानों को बेहतर आमदनी दिलाने के लिए लॉजिस्टिक्स और क्षमता-निर्माण में मदद दी जाएगी।

दौरे के दौरान, मंत्री ने किसान तपन हाफलॉन्गबार से उनके खेत पर मुलाक़ात की और उनकी खेती-बाड़ी की गतिविधियों और अनुभवों के बारे में बातचीत की।

समीक्षा बैठक और खेतों के दौरे से यह साफ़ हुआ कि सरकार 'डिमा हसाओ' में खेती की संभावनाओं को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इसके लिए खेती का दायरा बढ़ाना, सिंचाई के बेहतर इंतज़ाम करना, किसान संगठनों को मज़बूत करना और कल्याणकारी योजनाओं को ठीक से लागू करना ज़रूरी है।

मंत्री ने 'पुराना कोंग्कुरी, हमरी' में पाम ऑयल की खेती वाली जगह का भी दौरा किया और किसानों से बातचीत की। उन्होंने खेती में विविधता लाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए दूसरी उपयुक्त फसलों के साथ-साथ ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय