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असम में स्वदेशी समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार के प्रयास जारी रहेंगे: मुख्यमंत्री

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असम में स्वदेशी समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार के प्रयास जारी रहेंगे: मुख्यमंत्री


गुवाहाटी, 28 अक्टूबर (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने बुधवार को डिब्रूगढ़ स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में दो महत्वपूर्ण बैठकों की अध्यक्षता कर ऊपरी और उत्तरी असम के विभिन्न जिलों में स्वदेशी एवं जनजातीय समुदायों से जुड़े भूमि संबंधी मुद्दों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पात्र जनजातीय परिवारों के भूमि अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें जमीन का स्थायी स्वामित्व प्रदान करने के प्रयास जारी रखेगी।

डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने पहली बैठक में लखीमपुर, धेमाजी और माजुली के जिला आयुक्तों, वन विभाग के अधिकारियों तथा जनजातीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। दूसरी बैठक में मोरान और मटक समुदायों के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने भूमि संबंधी मुद्दे उठाए।

बैठकों में भूमि बंदोबस्ती से जुड़ी शिकायतों, आपत्तियों और राजस्व विभाग से संबंधित समस्याओं के समाधान पर चर्चा हुई। इसके अलावा, जनजातीय परिवारों को अधिकतम 50 बीघा जमीन आवंटित करने तथा मिशन बसुंधरा 2.0 और 3.0 के लंबित मामलों की मिशन बसुंधरा 4.0 के तहत समीक्षा करने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पात्र जनजातीय परिवारों को भूमि का स्थायी स्वामित्व देने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पात्र परिवारों की भूमि संबंधी समस्याओं और विवादों के समाधान के लिए सक्रिय कदम उठाए जाएंगे।

मोरान और मटक समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ हुई दूसरी बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि मिशन बसुंधरा 4.0 के तहत दोनों समुदायों के लिए तैयार दिशा-निर्देश पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की आबादी वाले जिलों में युवाओं के एक वर्ग को ऑनलाइन भूमि आवेदन करने में लोगों की सहायता के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने भूमि प्रीमियम जमा करने की समयसीमा बढ़ाने और भूमि बंदोबस्ती से जुड़ी समस्याओं का निर्धारित समय के भीतर समाधान करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मोरान और मटक समुदायों की भूमि संबंधी शिकायतों के निवारण के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

बैठकों में राजस्व मंत्री केशव महंत, श्रम कल्याण मंत्री रामेश्वर तेली, जनजातीय कार्य (मैदानी क्षेत्र) मंत्री डॉ. रानोज पेगू, जल संसाधन मंत्री सुषांत बरगोहाईं, विधायक बोलिन चेतिया, पूर्व विधायक पोनाकन बरुवा, विभिन्न स्वायत्त परिषदों के पदाधिकारी, जातीय संगठनों के प्रतिनिधि तथा वरिष्ठ सरकारी अधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश