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शांतिपूर्ण, आत्मनिर्भर और अवसरों से भरे असम के लिए मुख्यमंत्री ने अपना विज़न किया पेश

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शांतिपूर्ण, आत्मनिर्भर और अवसरों से भरे असम के लिए मुख्यमंत्री ने अपना विज़न किया पेश


गुवाहाटी, 15 अगस्त (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने गुवाहाटी के खानापारा में 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए एक शांतिपूर्ण, आत्मनिर्भर और अवसरों से भरे असम के लिए अपना विज़न पेश किया। उन्होंने विकास, सामाजिक सुधार, आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास पर ज़ोर दिया।

डॉ. सरमा ने कहा कि असम अब सिर्फ़ दूसरे राज्यों से सीख नहीं रहा है, बल्कि शांति, बुनियादी ढांचे, उद्योग, निवेश, सुधार और तकनीक पर आधारित विकास का अपना मॉडल बना रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा असम बनाना है जहां युवाओं को अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए राज्य छोड़कर न जाना पड़े।

राज्य की आर्थिक वृद्धि पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक से भी कम समय में असम की अर्थव्यवस्था लगभग तीन गुना हो गई है, जिससे राज्य को बड़े बदलाव लाने वाले बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों में निवेश करने की ज़्यादा क्षमता मिली है। उन्होंने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे आधुनिक उद्योगों के उभरने और बाइहाटा चारियाली-तेजपुर फोर-लेन हाईवे जैसी बड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाओं का ज़िक्र किया, जो असम के भीतर और अरुणाचल प्रदेश के साथ कनेक्टिविटी को मज़बूत कर रही हैं।

डॉ. सरमा ने हाल के महीनों में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें विधायक क्षेत्र विकास फंड बढ़ाना, गुवाहाटी एयरपोर्ट के पास एक नए सैटेलाइट शहर की योजना को आगे बढ़ाना और असम पुलिस की इमरजेंसी 112 सेवा को चौबीसों घंटे चलने वाली गाड़ियों के साथ आधुनिक बनाना शामिल है।

सामाजिक न्याय और महिलाओं की सुरक्षा पर मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने उन महिलाओं की मदद के लिए एक प्रस्तावित उपाय की घोषणा की जिन्हें सरकारी कर्मचारियों ने बिना कानूनी तलाक के छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपनी पहली पत्नी को कानूनी तलाक दिए बिना छोड़ देता है और किसी दूसरी महिला से अनौपचारिक शादी कर लेता है, तो उसकी सैलरी का 20 प्रतिशत हिस्सा काट लिया जाएगा और पहली पत्नी के सरकार को आवेदन करने पर सीधे उसके बैंक खाते में जमा कर दिया जाएगा, जिससे वह सम्मान के साथ जी सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र के कर्मचारियों द्वारा छोड़ी गई महिलाओं को भी ऐसी ही सुरक्षा देने के लिए कानून बनाने का प्रस्ताव कर रही है।

डॉ. सरमा ने बाल विवाह के खिलाफ़ लड़ाई जारी रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और कहा कि यह प्रथा बच्चों को उनके बचपन, शिक्षा और अवसरों से वंचित करती है। उन्होंने कहा कि असम की बेटियों और बेटों के भविष्य की रक्षा के लिए बाल विवाह के खिलाफ़ अभियान और ज़्यादा दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहना चाहिए।

असम के इतिहास में स्वर्गदेव चाओ लुंग सुकाफा के योगदान को याद करते हुए डॉ. सरमा ने कहा कि ब्रह्मपुत्र घाटी में उनके आगमन से एकीकरण, सह-अस्तित्व और एकता की एक ऐसी लंबी यात्रा शुरू हुई जिसने असमिया समाज को आकार दिया। उन्होंने बताया कि 2028 में सुकाफा के आगमन के 800 साल पूरे हो जाएंगे, और राज्य के सामाजिक ताने-बाने में उनके योगदान के ऐतिहासिक महत्व पर ज़ोर दिया।

मुख्यमंत्री ने असम के खिलाड़ियों की उपलब्धियों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि ओलंपिक पदक विजेता बॉक्सर लवलीना बोरगोहाईं और बैडमिंटन खिलाड़ी अस्मिता चालिहा के हालिया प्रदर्शन से यह साबित होता है कि सही मौके मिलने पर असम के युवा और युवतियां वैश्विक मंचों पर बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं।

डॉ. सरमा ने कहा कि सरकार का विज़न सिर्फ़ भौतिक बदलाव तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि मकसद हर नागरिक को सम्मान, हर युवा को अवसर, हर महिला को आर्थिक मज़बूती, हर गांव को कनेक्टिविटी और हर परिवार को उम्मीद दिलाना है।

उन्होंने देशभक्ति के महत्व पर भी ज़ोर दिया और कहा कि यह भारतीय सभ्यता का एक अभिन्न अंग है और आने वाली पीढ़ियां सभ्यता के इस संदेश को आगे बढ़ाएंगी।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर डॉ. सरमा ने असम के विकास, सामाजिक सद्भाव और एकता को मज़बूत करने की दिशा में लगातार प्रयास करने का आह्वान किया, साथ ही यह सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया कि तरक्की का फ़ायदा समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय