जुबीन गर्ग मौत मामले पर मुख्यमंत्री ने मीडिया के एक वर्ग पर उठाए सवाल
गुवाहाटी, 06 नवंबर (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने जुबीन गर्ग की मौत मामले की कवरेज को लेकर मीडिया के कुछ हिस्सों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने खासकर उन रिपोर्टों पर सवाल किया है जिनमें आरोपितों को जमानत मिलने की संभावना जताई जा रही थी, साथ ही उन बयानों में अंतर की ओर इशारा किया है जो गवाहों ने टीवी इंटरव्यू में दिए और जो उन्होंने अदालत के सामने दर्ज कराए।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार काे संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मीडिया द्वारा जुबीन को लेकर पूछे गये सवाल पर मीडिया के नैरेटिव पर चिंता जताई। उन्हाेंने सवाल किया कि ऐसी रिपोर्टें क्यों आ रही थीं कि आरोपितों को जमानत मिल जाएगी, जबकि उच्चतम न्यायालय ने अभी तक उनकी याचिकाओं पर कोई फैसला भी नहीं लिया था।
मुख्यमंत्री ने गौहाटी उच्च न्यायालय द्वारा अमृतप्रभा महंत को दी गई जमानत का भी जिक्र किया, जिसका आदेश जस्टिस प्रांजल दास ने दिया था। उन्होंने गवाहों के बयानों की व्याख्या पर सवाल उठाए और कहा कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान पेश किए गए सबूतों की बारीकी से जांच होनी चाहिए।
डॉ. सरमा ने इस बात पर भी जोर दिया कि कुछ गवाहों ने मीडिया इंटरव्यू में जो कहा और अदालत की कार्यवाही के दौरान जो बयान दिए, उनमें साफ तौर पर अंतर है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से दिए गए बयानों और अदालत में दर्ज कराए गए बयानों की अलग-अलग जांच होनी चाहिए। इस मामले में गवाहों की बड़ी संख्या का जिक्र करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि कई गवाहों को अभी अदालत के सामने गवाही देनी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें बिना किसी दबाव के गवाही देने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गवाहों पर दबाव नहीं डाल सकती। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस मामले की रिपोर्टिंग करते समय असम की भावनाओं और मूल्यों को समझना जरूरी है।
उन्होंने एक ऐसे गवाह का भी जिक्र किया, जिसने एक विरोध प्रदर्शन में जुबीन गर्ग की भूमिका को लेकर बयान दिया था, जिस पर मीडिया का काफी ध्यान गया। डॉ. सरमा ने सवाल उठाया कि इस तरह की बातों को किस तरह पेश किया जा रहा है और उनकी क्या व्याख्या की जा रही है।
इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में जमानत से जुड़ी कार्यवाही को 30 नवंबर तक के लिए टाल दिया है। इसमें श्यामकानू महंत और सिद्धार्थ शर्मा की जमानत याचिकाओं के साथ-साथ, गौहाटी हाई कोर्ट द्वारा अमृतप्रभा महंत और संदीपन गर्ग को दी गई जमानत के खिलाफ असम सरकार की चुनौतियां शामिल हैं।
इस मामले की सुनवाई एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चल रही है, जिसमें गवाहों से पूछताछ इस पूरी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

