काजीरंगा ईएसजेड घटाने का विरोध करने पर हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर निशाना साधा
गुवाहाटी, 17 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को काजीरंगा नेशनल पार्क के आसपास इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) को कम करने के प्रस्ताव का विरोध करने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस डिफॉल्ट 10-किमी जोन को बनाए रखने के नतीजों को नहीं समझती है।
डॉ. सरमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि काजीरंगा के आसपास का ईएसजेड, जो अभी डिफॉल्ट रूप से 10 किमी तक फैला है, उसे उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार एक किमी से तीन किमी तक कम किया जाएगा। उन्होंने ने कहा कि अगर बोकाखाट से कलियाबोर तक इको-सेंसिटिव जोन 10 किमी का होगा, तो वहां के लोग कैसे रहेंगे।
उन्होंने कहा कि बोकाखाट और कलियाबोर के निवासी इस मुद्दे पर पहले ही उच्चतम न्यायालय जा चुके हैं और स्थानीय समुदाय उन पाबंदियों के खिलाफ वर्षों से विरोध कर रहा है, जो उनके घरों, आजीविका और व्यवसायों पर असर डाल सकती है।
उन्होंने पूछा कि अगर आप स्थानीय लोगों को काजीरंगा से हटा देंगे, तो ये लोग कहां जाएंगे? डॉ. सरमा ने कहा कि यह मुद्दा उनके या सरकार के बारे में नहीं है, बल्कि काजीरंगा के आस-पास रहने वाले लोगों के बारे में है। उन्होंने इस कदम का विरोध करने के लिए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की आलोचना की और आरोप लगाया कि उन्हें जमीनी हालात की समझ नहीं है।
इको-सेंसिटिव जोन पर न्यायालय के निर्देशों का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि 10 किमी का डिफॉल्ट नियम उसी तरह लागू नहीं होता है और न्यायालय की गाइडलाइंस के अनुसार काजीरंगा के आस-पास के जोन को कम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 10 किमी का ईएसजेड बनाए रखने से इलाके में बस्तियों और आर्थिक प्रतिष्ठानों, जिसमें नुमालीगढ़ रिफाइनरी भी शामिल है, पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, अगर इको-सेंसिटिव जोन 10 किमी का होगा, तो रिफाइनरी भी चली जाएग और कलियाबोर व बोकाखाट के लोग भी चले जाएंगे।
वंतारा तकनीकी मदद देता है- डॉ. सरमा
वंतारा से जुड़े प्रस्ताव पर डॉ. सरमा ने कहा कि संगठन ने असम आकर खुद अस्पताल चलाने की पेशकश नहीं की है। इसके बजाय, उसने घायल हाथियों के लिए अस्पताल बनाने में राज्य की मदद करने के लिए तकनीकी सहायता की पेशकश की थी। उन्होंने कहा कि असम में इंसान और हाथी के बीच टकराव एक आम समस्या है और ऐसी घटनाओं में अक्सर हाथी घायल हो जाते हैं।
डॉ. सरमा ने कहा कि सरकार कोई भी फैसला लेने से पहले इस प्रस्ताव पर विचार करेगी। उन्होंने कहा, हम इसकी जांच करेंगे। हम इसका स्वागत करते हैं, और अगर यह हमारे लिए सही रहा, तो हम इसे अपना लेंगे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

