असम में दुर्गा पूजा पंडालों की संख्या 9,002 : मुख्यमंत्री
गुवाहाटी, 18 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को बताया कि असम में इस साल (2026) दुर्गा पूजा पंडालों की संख्या अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। राज्य भर में कुल 9,002 सामुदायिक दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने इस वृद्धि का श्रेय राज्य में कायम शांति, भरोसे और सद्भाव को दिया है।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार काे पूजा समितियों, स्वयंसेवकों, पुलिसकर्मियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को इन आयोजनों को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया।
असम में अब तक की सबसे अधिक संख्या। यह आज पूरे असम में मौजूद शांति, भरोसे और सद्भाव को दर्शाता है। उन्होंने इन आयोजनों को संभव बनाने के लिए दिन-रात काम करने वालों का भी दिल से आभार जताया और अपना संदेश जोई मां दुर्गा (जय मां दुर्गा) के साथ समाप्त किया।
मुख्यमंत्री द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार, असम में 2024 में 8,381 और 2025 में 8,521 दुर्गा पूजा पंडाल थे। 2026 के आंकड़े पिछले साल की तुलना में 481 और 2024 की तुलना में 621 अधिक हैं।
असम में दुर्गा पूजा में लोगों की भारी भागीदारी देखने को मिल रही है। सामुदायिक समितियां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ भव्य सजावट, कलात्मक रचनाओं और सांस्कृतिक विषयों (थीम) को शामिल कर रही हैं। गुवाहाटी इन उत्सवों के मुख्य केंद्रों में से एक है, जहां शहर के विभिन्न इलाकों में हो रहे आयोजन भक्तों और दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं।
राज्य की राजधानी में कई प्रमुख पंडालों ने इस साल पौराणिक कथाओं, वास्तुकला और स्थानीय विरासत से प्रेरित थीम अपनाई हैं। बिष्णुपुर सार्वजनिक दुर्गा पूजा में 'नागलोक' थीम को अपनाया गया है, जो सांपों की पौराणिक दुनिया पर आधारित है। यहां पानी का एक ऐसा सेटअप तैयार किया गया है, जिससे लोग नाव के जरिए प्रतिमा तक पहुंच सकते हैं। 76वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी यह पूजा, शहर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। छत्रीबाड़ी दुर्गा पूजा में असम के मूल समुदायों पर विशेष ध्यान दिया गया है। यहां बोडो, मिसिंग, राभा, देओरी और कोच-राजबंशी सहित 14 समुदायों की परंपराओं, पहनावे और पहचान को प्रदर्शित किया गया है। 60 फीट से अधिक ऊंचे इस पंडाल में पारंपरिक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक झांकियों को शामिल किया गया है।
अन्य आकर्षणों में पांडु के रेस्ट कैंप कालीबाड़ी में थाईलैंड से प्रेरित एक पंडाल है। इसके अलावा, अदाबाड़ी के कामाख्या नगर में जगन्नाथ मंदिर से प्रेरित एक विशेष सजावट (इंस्टॉलेशन) भी तैयार की गई है। पानबाजार के युबतीर्थ क्लब ने भी जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला पर आधारित 'दशावतार' थीम को अपनाया है। इन भव्य सजावटों के साथ-साथ, लंबे समय से चले आ रहे सामुदायिक आयोजन भी इस उत्सव में मुख्य भूमिका निभाते हैं। गुवाहाटी की सबसे पुरानी दुर्गा पूजा मानी जाने वाली 'उजान बाजार बारोवारी पूजा' की शुरुआत 1821 में अहोम शाही परिवार के एक निजी आयोजन के रूप में हुई थी, जो 1889 में एक सामुदायिक उत्सव में बदल गई।
आयोजनों की यह बड़ी संख्या इस साल के उत्सव के व्यापक स्तर को दर्शाती है, जिसमें पूरे राज्य में पारंपरिक सामुदायिक पूजा के साथ-साथ नई थीम पर आधारित सजावटें भी शामिल हैं। डॉ. सरमा ने इन उत्सवों का आयोजन करने वाली समितियों और स्वयंसेवकों के साथ-साथ, भीड़ को नियंत्रित करने और उत्सव के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार पुलिस और अन्य सरकारी कर्मियों की सराहना की।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

