सीआईडी ने फ़र्ज़ी नौकरी रैकेट के आरोपित को किया गिरफ़्तार
गुवाहाटी, 25 जुलाई (हि.स.)। असम पुलिस की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने असम राइफल्स में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक फर्जी भर्ती रैकेट का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपित को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि आरोपित ने कई युवाओं को सरकारी नौकरी का झूठा सपना दिखाकर उनसे बड़ी रकम ऐंठी है। मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
सीआईडी की ओर से शनिवार को जारी जानकारी के अनुसार, बीते 4 जुलाई को सीआईडी पुलिस स्टेशन में लखीमपुर जिले के बिहपुरिया निवासी मोंटू ठेंगाल (25) सहित कई शिकायतकर्ताओं ने फर्जी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी किए जाने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि सभी पीड़ित सरकारी नौकरी की तलाश में थे और इसी दौरान वे इस ठगी का शिकार बने।
प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता 20 जुलाई को शिलांग में आयोजित असम राइफल्स की भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे, लेकिन उनका चयन नहीं हो सका। भर्ती प्रक्रिया के बाद उनकी मुलाकात नगांव जिले के धिंग थाना क्षेत्र के लालिपथर निवासी मो. अनवर हुसैन से हुई। आरोपित ने खुद को असम राइफल्स का 'मेजर' बताते हुए दावा किया कि उसके वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे संपर्क हैं और वह अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर 'दया के आधार पर' उम्मीदवारों को असम राइफल्स में नौकरी दिलवा सकता है।
शिकायत के अनुसार, आरोपित ने उम्मीदवारों का विश्वास जीतने के लिए उन्हें भरोसा दिलाया कि चयन की पूरी जिम्मेदारी उसकी होगी। इसके एवज में उसने प्रत्येक अभ्यर्थी से ₹3 लाख 50 हजार से लेकर ₹10 लाख तक की रकम की मांग की। अपने दावे को विश्वसनीय बनाने के लिए उसने कथित तौर पर एक लिखित समझौता-पत्र भी तैयार किया, जिसका विवरण बीजेएन नंबर 03/122, बुक नंबर 18/25 तथा दिनांक 22 अगस्त 2025 अंकित है। इस दस्तावेज के आधार पर उसने पीड़ितों को विश्वास में लिया कि नौकरी सुनिश्चित है।
आरोपित के झांसे में आकर शिकायतकर्ताओं ने अलग-अलग तिथियों में गूगल पे, बैंक ट्रांसफर और नकद माध्यम से ₹3.50 लाख से लेकर ₹10 लाख तक की रकम उसे सौंप दी। हालांकि, रकम लेने के बाद न तो किसी को असम राइफल्स में नौकरी मिली और न ही आरोपित ने पीड़ितों के पैसे लौटाए। लगातार टालमटोल और संपर्क से बचने के बाद पीड़ितों को अपने साथ ठगी होने का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने सीआईडी में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की जांच के दौरान सीआईडी ने तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए 24 जुलाई को मोरीगांव जिले के गोरुखुटी, मोइराबारी क्षेत्र से मुख्य आरोपित मो. अनवर हुसैन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपित को अदालत में पेश किया जाएगा तथा उससे पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
सीआईडी अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि आरोपित ने सरकारी नौकरी दिलाने का झूठा भरोसा देकर बड़ी संख्या में युवाओं से ठगी की हो सकती है। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस कथित फर्जी भर्ती रैकेट में अन्य लोग या कोई संगठित गिरोह शामिल था या नहीं। मामले की जांच जारी है और आगे की जांच में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।-----------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

