असम में इंफ्रास्ट्रक्चर का मेगा प्रोजेक्ट, ब्रह्मपुत्र के नीचे बनेगी देश की पहली रोड-रेल सुरंग
- ब्रह्मपुत्र के नीचे देश की प्रथम एकीकृत सड़क–रेल सुरंग के निर्माण की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाता असम
गुवाहाटी, 03 सितंबर (हि.स.) असम के विकास की अविराम और अदम्य यात्रा अब अभूतपूर्व ऊँचाइयों को छूने की दिशा में अग्रसर है। विशेष रूप से, राज्य के अवसंरचनात्मक रूपांतरण ने हाल के समय में उल्लेखनीय और चमत्कारिक गति प्राप्त की है। असम आज ऐसे अनेक महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी परियोजनाओं के क्रियान्वयन की ओर दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ रहा है, जिनकी कभी राज्य की जनता ने स्वप्न में भी कल्पना नहीं की थी। इन ऐतिहासिक परियोजनाओं के सफलतापूर्वक पूर्ण हो जाने के पश्चात असम देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की असम के प्रति गहरी आत्मीयता, अटूट सद्भावना और अडिग प्रतिबद्धता तथा मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा की प्रशासनिक दक्षता, दूरदर्शिता, कार्यकुशलता और राज्य के प्रति समर्पित दायित्वबोध के कारण ही असम उन स्वप्नों को साकार करने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ सका है, जिन्हें कभी असंभव माना जाता था। ऐसी ही एक परिवर्तनकारी परियोजना है गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच प्रस्तावित सुरंग मार्ग। प्रचंड ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे सुरंग निर्माण का यह असाधारण और कभी अकल्पनीय सपना अब वास्तविकता का स्वरूप ग्रहण करने की दिशा में तीव्र गति से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने इस महत्वाकांक्षी सड़क तथा रेल सुरंग परियोजना के निर्माण हेतु पहले ही निविदाएं आमंत्रित कर दी हैं। निविदाएं आमंत्रित किए जाने के साथ ही इस विराट और दूरदर्शी परियोजना के वास्तविक क्रियान्वयन की दिशा में पहला निर्णायक कदम उठाया जा चुका है।
उपरोक्त बातें प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन में गुरुवार काे आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी प्रवक्ता कमल कुमार मेधी ने की। उन्होंने परियोजना की प्रमुख विशेषताओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पांच वर्षों के भीतर पूर्ण किए जाने के लक्ष्य के साथ प्रस्तावित यह परियोजना गोहपुर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-15 को नुमालीगढ़ स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-715 से जोड़ेगी। इस परियोजना के अंतर्गत 33.77 किलोमीटर लंबा, चार लेन वाला, एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जिसमें ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग का निर्माण किया जाएगा। इन दो सुरंग ट्यूबों में से एक में रेलवे अवसंरचना का भी प्रावधान होगा। इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मॉडल के अंतर्गत क्रियान्वित की जाने वाली इस परियोजना की कुल पूंजीगत लागत ₹18,662.02 करोड़ निर्धारित की गई है। इसमें सिविल निर्माण की अनुमानित लागत ₹11,982.36 करोड़ तथा भूमि अधिग्रहण की लागत ₹716.65 करोड़ निर्धारित की गई है।
परियोजना में 1.26 किलोमीटर लंबा कट-एंड-कवर सड़क खंड तथा चार किलोमीटर लंबा कट-एंड-कवर रेलवे खंड भी सम्मिलित होगा। परियोजना पूर्ण होने के पश्चात इसके भारत की पहली एकीकृत सड़क एवं रेल अंडरवॉटर सुरंग तथा विश्व में अपने प्रकार की संभावित रूप से दूसरी ऐसी सुरंग बनने की संभावना है। वर्तमान में नुमालीगढ़ और गोहपुर के बीच सड़क मार्ग की दूरी लगभग 240 किलोमीटर है। यात्री वाहनों को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान तथा कालियाभोमोरा पुल से होकर गंतव्य तक पहुँचने में लगभग पांच से छह घंटे का समय लगता है। उन्होंने बताया कि नया कॉरिडोर चालू होने के बाद यह दूरी नाटकीय रूप से घटकर लगभग 34 किलोमीटर रह जाएगी, जबकि यात्रा का समय लगभग 20 मिनट तक सीमित हो जाएगा। गोहपुर छोर पर यह परियोजना पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के रंगिया मंडल की रंगिया–मुरकोंगसेलेक रेल लाइन से जुड़ जाएगी।
वहीं नुमालीगढ़ छोर पर यह तिनसुकिया मंडल की फरकाटिंग–मरियानी लूप लाइन के साथ संपर्क स्थापित करेगी। सड़क संपर्क के दृष्टिकोण से यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-15 और राष्ट्रीय राजमार्ग-715 को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ेगा। यह परिवर्तनकारी संपर्क व्यवस्था नुमालीगढ़, गोहपुर, तेजपुर, डिब्रूगढ़ और ईटानगर के बीच कहीं अधिक तेज, निर्बाध और सुविधाजनक आवागमन सुनिश्चित करेगी। परियोजना के कारण डोनी पोलो होलोंगी हवाई अड्डे और तेजपुर हवाई अड्डे तक पहुँच भी और अधिक सुगम होगी। इसके अतिरिक्त नुमालीगढ़, गोहपुर, गोलाघाट टाउन और सिमालुगुड़ी जंक्शन रेलवे स्टेशनों के साथ संपर्क और सुदृढ़ होगा। विश्वनाथ घाट और तेजपुर के अंतर्देशीय जलमार्ग टर्मिनल भी इस समन्वित बहु-माध्यमीय संपर्क व्यवस्था से महत्वपूर्ण रूप से लाभान्वित होंगे।
प्रस्तावित कॉरिडोर 11 आर्थिक केंद्रों, तीन सामाजिक केंद्रों, दो पर्यटन केंद्रों और आठ लॉजिस्टिक केंद्रों के बीच बहुआयामी संपर्क को अत्यंत सुदृढ़ करेगा। नुमालीगढ़ औद्योगिक क्षेत्र, जोरहाट डीआईसी, तिताबर आईआईडीसी, जोनाकीनगर औद्योगिक क्षेत्र, नगांव औद्योगिक एस्टेट, डेमो आईआईडीसी, शिवसागर औद्योगिक एस्टेट, नलतली आईआईडीसी, दोलाबाड़ी औद्योगिक क्षेत्र, विश्वनाथ मिनी औद्योगिक क्षेत्र तथा जोगीघोपा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क को उन्नत संपर्क का प्रत्यक्ष और व्यापक लाभ प्राप्त होगा। पर्यटन क्षेत्र को भी इस परियोजना से एक नई ऊर्जा और उल्लेखनीय गति मिलने की संभावना है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और देवपहाड़ पुरातात्त्विक स्थल तक अधिक सुगम एवं तीव्र पहुंच से पर्यटन को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। यह परियोजना दीमा हसाओ जैसे जनजातीय जिलों तथा उदलगुड़ी और दरंग जैसे आकांक्षी जिलों के साथ आर्थिक संपर्क को और अधिक सशक्त बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी। यह सुरंग केवल असम के लिए ही महत्वपूर्ण परियोजना नहीं होगी, बल्कि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और समूचे पूर्वोत्तर भारत के लिए एक रणनीतिक संपर्क जीवनरेखा का कार्य करेगी।
ब्रह्मपुत्र के उत्तरी और दक्षिणी तटों के बीच तीव्र संपर्क स्थापित होने से मालवाहक परिवहन का समय तथा लॉजिस्टिक लागत उल्लेखनीय रूप से कम होगी। राष्ट्रीय रक्षा और सामरिक गतिशीलता की दृष्टि से भी यह परियोजना असाधारण महत्व रखती है। सीमावर्ती क्षेत्रों तक सामग्री, उपकरण और कार्मिकों की तीव्र आवाजाही के लिए यह एक वैकल्पिक, विश्वसनीय और सुदृढ़ संपर्क मार्ग प्रदान करेगी। परियोजना के अंतर्गत वार्षिक औसत दैनिक यातायात लगभग 4,680 पैसेंजर कार यूनिट रहने का अनुमान है। निर्माण अवधि के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 80 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना भी व्यक्त की गई है।
भाजवा प्रवक्ता कमल कुमार मेधी ने संवाददाता सम्मेलन में आगे कहा कि गोहपुर–नुमालीगढ़ ब्रह्मपुत्र अंडरवॉटर टनल परियोजना के पूर्ण हो जाने पर यह न केवल असम के दोनों तटों को एक-दूसरे के और अधिक निकट लाएगी, बल्कि समूचे पूर्वोत्तर भारत में व्यापार, उद्योग, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और सामरिक संपर्क के एक नए युग का सूत्रपात करेगी।
मेधी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने असम की सड़क संपर्क व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया है। इस अभूतपूर्व अवसंरचना अभियान के अंतर्गत दूसरा सरायघाट पुल, ढोला–सादिया पुल, बोगीबील पुल, दूसरा कालियाभोमोरा पुल तथा गुवाहाटी–उत्तर गुवाहाटी पुल पूर्ण किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त जोरहाट–माजुली पुल, पलाशबाड़ी–सुआलकुची पुल, धुबरी–फुलबाड़ी पुल, नारेंगी–कुरुवा पुल, सरायघाट पर तीसरा पुल तथा निर्माणाधीन धुनागुड़ी–माजुली पुल सहित विभिन्न परियोजनाओं में लगभग ₹4,23,289 करोड़ का निवेश किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त जोरहाट–तिनसुकिया, नगांव–होलोंगी और लामडिंग–सिलचर चार-लेन राजमार्गों के पूर्ण होने के साथ-साथ कई अन्य प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं के प्रारंभिक कार्य या तो पूर्ण हो चुके हैं अथवा प्रारंभ कर दिए गए हैं। इनमें काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर, सिलचर में बरापानी–गुवाहाटी ग्रीनफील्ड रोड, बैहाटा–तेजपुर चार-लेन राजमार्ग तथा गुवाहाटी रिंग रोड जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं सम्मिलित हैं, जिन पर लगभग ₹65,341 करोड़ का निवेश किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

