किसान उत्पादक संगठनों को आर्थिक अनुदान किसानों के लिए क्रांतिकारी कदम : बोरा
गुवाहाटी, 27 फरवरी (हि.स.)। किसानों के विकास के क्षेत्र में सरकार द्वारा किसान उत्पादक संगठनों को प्रदान किया जाने वाला आर्थिक अनुदान एक क्रांतिकारी कदम है। यह टिप्पणी भारतीय किसान संघ, असम के संगठनिक सचिव कृष्णकांत बोरा ने शुक्रवार काे दिसपुर प्रेस क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए की।
उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री उत्कर्ष योजना के तहत असम सरकार ने असम के 254 किसानों की उत्पादक संस्थाओं को प्रारंभिक पूंजी (सीड मनी) के रूप में आर्थिक अनुदान प्रदान करके एक क्रांतिकारी कदम उठाया, इसके लिए भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री और असम सरकार की सराहना की है। कई किसान उत्पादक संस्थाएं भले ही सभी सुविधाओं से लैस थीं, लेकिन केवल प्रारंभिक पूंजी के अभाव में आगे बढ़ नहीं पा रही थीं, तथा कई बार किसानों की अपनी पहल होने के बावजूद कच्चा माल खरीदने के लिए पूंजी के अभाव में उद्योग स्थापित होने के बाद भी अव्यवस्थित स्थिति में थे। इसलिए असम सरकार की इस आर्थिक सहायता से किसानों को पर्याप्त सहारा मिलेगा, यह उम्मीद व्यक्त की जाती है।
बोरा ने कहा कि खासकर महिला किसान उत्पादक संगठन और अंदरूनी क्षेत्रों के उपांत किसान जुड़े किसान उत्पादक संगठनों के लिए यह धन राशि मृत संजीवनी का काम करेगी। भारतीय किसान संघ पिछले 10 वर्षों से असम में किसान उत्पादक संगठन बनाने, किसानों के बीच जागरूकता पैदा करने के माध्यम से किसान उत्पादक संगठन की आवश्यकता को समझाने, सरकार और व्यावसायिक क्षेत्र में संपर्क स्थापित करने आदि कामों में निरंतर लगे हुए हैं, जिसके फलस्वरूप अब तक असम के लगभग सभी जिलों में भारतीय किसान संघ की सक्रिय सहयोग और मार्गदर्शन से सैंकड़ों किसान उत्पादक संगठन उभर कर सामने आए हैं।
इसी तरह सरकार द्वारा प्रदान किए गए अनुदान का उपयोग सुनिश्चित अवधि में किसान उत्पादक संस्थाओं द्वारा प्रभावी रूप से किए जाने और उसका लाभ उठाने के लिए भारतीय किसान संघ ने असम सरकार से कुछ मांगों को पूरा करने का आह्वान किया। वे मांगें यह हैं कि जिलाधिकार कृषि कार्यालय से इस अनुदान के सही उपयोग पर सतर्क निगरानी रखी जानी चाहिए और इस संबंध में अनुदान राशि के उपयोग पर, चाहे वह कच्चा माल खरीदने में हो या उद्योग स्थापित करने और अंतर्गठनी विकास के कार्य में, सही मार्गदर्शन और सलाह देने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
दूसरे, किसानों के उत्पादक संगठनों में यह सुनिश्चित करने के लिए कि उन्हें अपना व्यवसाय बढ़ाने में कोई कठिनाई न हो और अंतर-संरचना के विकास में उन्हें सही मार्गदर्शन मिल रहा है या नहीं, सरकार को राज्य स्तर पर एक विशेषज्ञ और अनुभवी व्यक्ति की स्पेशल टास्क फोर्स गठित करनी चाहिए।
साथ ही खिलंजिया (स्थानीय) बीज उत्पादक कृषि उद्यमी, आदर्श कृषक उत्पादक संस्था को उच्छेदित भूमि का आवंटन देकर वहां जलवायु के अनुसार मेल खाने वाले बीज उत्पादन और असम में व्यापक मांग वाले अत्यावश्यक सामग्री जैसे - मसूर दाल, मूंग दाल, आलू, प्याज, लहसून आदि की व्यापक पैमाने पर खेती करवाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट अपनाना चाहिए। बीज उत्पादक किसान और कृषक उत्पादक संस्था से सरकार को बीज की व्यवस्था करनी चाहिए।
साथ ही सरकार द्वारा किसानों के धान खरीदने के लिए जो दूरगामी कदम उठाए, उसके लिए किसान समाज हमेशा सरकार के प्रति आभारी है, फिर भी वर्तमान समय में एफसीआई तथा अन्य धान खरीद एजेंसियों को किसानों के धान खरीद व्यवस्था में पीपीसी सेंटर के प्रबंधक और धान मिल मालिकों की किसानों के प्रति जिम्मेदारी के सही मूल्यांकन पर एक व्यावहारिक अध्ययन करने की आवश्यकता है।
इसके अलावा, भारतीय किसान संघ के नेता ने मुख्यमंत्री से कृषि विभाग द्वारा सब्सिडी दरों पर दिए जाने वाले सौर ऊर्जा चालित उछले नदी-तालाब और जलसिंचाई विभाग की जलसिंचाई योजनाओं के कार्यान्वयन पर कड़ी नजर रखने का आग्रह किया।
संवाददाता सम्मेलन में भारतीय किसान संघ के असम राज्य कोषाध्यक्ष विकास सिंह और राज्य कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप पाठक भी उपस्थित थे।----------------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

