राष्ट्रपति का अपमान लोकतंत्र का अपमान: मीता एन.बोरा
गुवाहाटी, 08 मार्च (हि.स.)। असम प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रवक्ता मीता एन. बोरा ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान हुई घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रपति का अपमान देश के लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।
रविवार को अटल बिहारी वाजपेयी भवन स्थित असम प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मीती एन. बोरा ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बीते शनिवार को पश्चिम बंगाल में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में भाग लेने गई थीं। यह सम्मेलन संथाल समुदाय के लोगों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर आदिवासी कल्याण, सांस्कृतिक संरक्षण और समुदाय की भविष्य की आकांक्षाओं पर चर्चा करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि संथाल समुदाय भारत के सबसे बड़े आदिवासी समुदायों में से एक है, जिसकी देशभर में 70 लाख से अधिक आबादी है, जबकि पश्चिम बंगाल में ही 25 लाख से अधिक संथाल समुदाय के लोग निवास करते हैं।
भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, सम्मेलन का मूल आयोजन स्थल बिधाननगर, सिलिगुड़ी तय किया गया था, जो बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को समायोजित करने में सक्षम था। हालांकि बाद में इसे बदलकर गोसाईपुर, बागडोगरा कर दिया गया, जो अपेक्षाकृत छोटा और कम सुविधाजनक स्थान बताया गया। इस बदलाव के कारण बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोग सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके।
बोरा ने कहा कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल के उल्लंघन की खबरें भी सामने आई हैं। परंपरा के अनुसार जब भी भारत के राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाते हैं, तो राज्य के मुख्यमंत्री या सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि उनका औपचारिक स्वागत करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि राष्ट्रपति के स्वागत के लिए उपस्थित नहीं था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस स्थिति को “शर्मनाक और अभूतपूर्व” बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए निराशाजनक हैं और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान राजनीति से ऊपर होना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी उन तरीकों की कड़ी निंदा करती है, जिनसे राष्ट्रपति की यात्रा को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने संभाला। उन्होंने कहा कि देश के प्रथम नागरिक के पद की गरिमा और सम्मान हर परिस्थिति में बनाए रखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यह घटना इसलिए भी दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आसपास हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु न केवल देश की संवैधानिक प्रमुख हैं, बल्कि इस पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी महिला भी हैं, जो देशभर के लाखों लोगों की आकांक्षाओं और गर्व का प्रतिनिधित्व करती हैं।
मीता बोरा ने कहा कि भाजपा हमेशा से आदिवासी समुदायों और महिलाओं के सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता मानती रही है। असम में महिलाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। ओरुणोदोई योजना के तहत राज्य में करीब 40 लाख महिलाओं को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता मिल रही है। इसके अलावा उद्यमिता योजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की 30 लाख से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं।
इसी तरह निजुत मोइना योजना के तहत 3.5 लाख से अधिक छात्राओं को शिक्षा जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इन पहलों के परिणामस्वरूप असम में सामाजिक प्रगति देखने को मिली है। राज्य में बाल विवाह के मामलों में लगभग 84 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि मातृ मृत्यु दर में करीब 30 प्रतिशत और शिशु मृत्यु दर में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इन उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं और जनजातीय समुदायों की भागीदारी और सशक्तिकरण के माध्यम से ही राष्ट्र के समग्र विकास को गति दी जा सकती है।-----------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

