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असमः कांग्रेस में हर क्षेत्र में मेरी उपेक्षा की गईः प्रद्युत बरदलै

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असमः कांग्रेस में हर क्षेत्र में मेरी उपेक्षा की गईः प्रद्युत बरदलै


गुवाहाटी, 21 मार्च (हि.स.)। कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बरदलै ने शनिवार को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष एवं सांसद गौरव गोगोई पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस में मेरी सभी क्षेत्रों में अनदेखी की गयी।

कांग्रेस से इस्तीफा देने और भाजपा में शामिल होने के बाद आज शाम अपने पहले संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बरदलै ने कहा कि कांग्रेस में हर क्षेत्र में मेरी उपेक्षा की गई। चारों ओर शक का माहौल था। जिन नेताओं ने मुझ पर हमला किया, उन्हें महत्व दिया गया और मेरा बार-बार अपमान किया गया।

कांग्रेस के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए बरदलै ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा बहुत पहले शुरू हो गई थी। छात्र राजनीति में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा, मैं 16 साल की उम्र में नेशनल स्टूडेंट यूनियन आफ इंडिया (एनएसयूआई) में शामिल हो गया था। कांग्रेस की वजह से ही मेरे व्यक्तित्व का विकास हुआ। उन्होंने 1978 के एक पल का भी ज़िक्र किया, जब उन्होंने आपातकाल के बाद असम दौरे पर आईं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि बरदलै ने इंदिरा गांधी को एक गमोछा ओढ़ाया था और इसके लिए उन्हें उन्हें कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव पद से हटा दिया गया था और उन्हें अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था।

बरदलै ने आंतरिक विवादों के दौरान समर्थन न मिलने पर भी निराशा व्यक्त की। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की टिप्पणियों का ज़िक्र करते हुए बरदलै ने कहा कि इमरान मसूद द्वारा मेरे बयानों को झूठा बताने के बावजूद गौरव गोगोई ने एक बार भी कुछ नहीं कहा। इसके बजाय, उन्होंने कहा कि मैं ही मनगढ़ंत बातें बना रहा हूँ।

बरदलै ने खुलासा किया कि उन्हें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से दिसपुर से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव मिला था। उन्होंने कहा कि वे भाजपा की संस्कृति से परिचित नहीं थे। वे बस अपने आत्म-सम्मान की रक्षा करना और असम को आगे ले जाने में योगदान देना चाहते थे। उनकी कोई पूर्व शर्त नहीं थी। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में उन्हें जो “स्वागत और समर्थन” मिला है, उससे उन्हें तसल्ली मिली है।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों में उन्हें बार-बार इस तरह के प्रस्ताव मिलते रहे हैं। बरदलै ने कहा कि उन्हें कई सालों से ऑफ़र मिल रहे थे, लेकिन वे उन्हें ठुकराते रहे। कांग्रेस के पूर्व सांसद बरदलै ने 20 मार्च को भाजपा में शामिल होने और दिसपुर से अपनी उम्मीदवारी को एक बहुत मुश्किल और दर्दनाक फ़ैसला बताया, साथ ही पार्टी में घुल-मिल जाने का भरोसा भी जताया।

भाजपा उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारे जाने के बाद बोलते हुए, बरदलै ने कहा कि उन्हें पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बहुत गर्मजोशी भरा स्वागत मिला है, जिससे उन्हें अपने इस कदम को लेकर तसल्ली मिली है। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत मुश्किल और दर्दनाक फ़ैसला रहा है, लेकिन उन्हें जिस गर्मजोशी से स्वागत किया गया और जो अपनापन मिला है, उससे उन्हें तसल्ली मिली है। उन्हें पूरा भरोसा है कि वे भाजपा परिवार में आसानी से घुल-मिल जाऊंगा।

खुद को ढालने की अपनी इच्छा पर ज़ोर देते हुए, बरदलै ने कहा कि वे एक अच्छे विद्यार्थी हैं। मैं सीखूंगा और भाजपा का एक अच्छा साथी बनने की कोशिश करूंगा। अपनी उम्मीदवारी को लेकर ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में संभावित नाराज़गी को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व के पास एक नए सदस्य के तौर पर उन्हें मैदान में उतारने के पीछे ज़रूर कोई ठोस वजह रही होगी। उन्होंने कहा कि उनका नज़रिया साफ़ है, मैं हाथ जोड़कर उनके पास जाऊंगा और उनसे उनका मार्गदर्शन, समर्थन और आशीर्वाद मांगूंगा।

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय