home page

मुख्यमंत्री सरमा के नेतृत्व में असम में विकास व सांस्कृतिक पहचान को मिली नई मजबूती: भाजपा

 | 
मुख्यमंत्री सरमा के नेतृत्व में असम में विकास व सांस्कृतिक पहचान को मिली नई मजबूती: भाजपा


गुवाहाटी, 17 मार्च (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के दूरदर्शी और दृढ़ नेतृत्व में राज्य के हर कोने में विकास की एक मजबूत लहर फैल रही है। बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, परिवहन और शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति के साथ-साथ, राज्य की भाषा, विरासत और सांस्कृतिक पहचान में भी तेजी से और सार्थक प्रगति देखने को मिल रही है। ये बातें प्रदेश भाजपा प्रवक्ता कल्याण गोगोई ने कही।

गुवाहाटी के वशिष्ठ स्थित प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में असम में 10 हजार बीघा से अधिक सत्र (मठ) भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। विशेष रूप से, बटद्रवा थान की 140 बीघा, दक्षिण पाट सत्र की 6 बीघा, बरपेटा सत्र की 40 बीघा और ग्वालपारा सत्र की 37 बीघा भूमि को सफलतापूर्वक वापस हासिल कर लिया गया है।

कल्याण गोगोई ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक यह है कि 2024 में असमिया भाषा को 'शास्त्रीय भाषा' का प्रतिष्ठित दर्जा दिया गया, जो एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। इसके अलावा, चराइदेव मैदाम को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे असम की सांस्कृतिक विरासत वैश्विक मंच पर और अधिक गौरवान्वित हुई है।

उन्होंने बताया कि 13 दिसंबर, 2022 को पारंपरिक 'गमोछा' को जीआई टैग प्रदान किया गया, जो असम के सांस्कृतिक गौरव की वैश्विक पहचान का प्रतीक है। 'असम दर्शन योजना' के तहत, राज्य सरकार ने 34,939 धार्मिक संस्थानों के विकास के लिए 614 करोड़ की राशि स्वीकृत की है, जो आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने वीर लचित बोरफुकन की विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस महान योद्धा की 400वीं जयंती 24 नवंबर, 2022 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में बड़े ही भव्य तरीके से मनाई गई और वर्ष भर चले समारोहों का समापन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुआ। जोरहाट में इस महान नायक की 125 फुट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की गई है।

प्रवक्ता ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भाजपा सरकार ने स्थानीय भाषाओं की सुरक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। इस पहल के तहत, शैक्षणिक सत्र 2026–27 से कक्षा नौवीं में और 2027–28 से कक्षा दसवीं में डिमासा भाषा को एक वैकल्पिक एमआईएल विषय के रूप में शामिल किया जाएगा।

यह निर्णय नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनॉमस काउंसिल (एनसीएचएसी) के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में मातृभाषा-आधारित शिक्षा सुनिश्चित करेगा और आदिवासी पहचान के संरक्षण को मज़बूत करेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार ने बोडो साहित्य सभा को एक बीघा ज़मीन आवंटित करने का निर्णय लिया है, जिससे भाषाई और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और भी मज़बूत हुई है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के मज़बूत और निर्णायक नेतृत्व में विकास की यह निरंतर लहर हर असमिया नागरिक तक पहुंची है, जिसने जाति, समुदाय, भाषा और धर्म की सभी बाधाओं को पार कर लिया है। असम की जनता ने अब भाजपा सरकार को आत्मीय विश्वास और भरोसे के साथ अपनाया है। इसी ज़बरदस्त जनविश्वास की बदौलत भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल करने की ओर अग्रसर है।

--------------

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय