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'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' शासन व्यवस्था को प्रगतिशील और अधिक जन-केंद्रित बनाएगा: असम भाजपा

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'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' शासन व्यवस्था को प्रगतिशील और अधिक जन-केंद्रित बनाएगा: असम भाजपा


गुवाहाटी, 13 अप्रैल (हि.स.)। महिला सशक्तिकरण को मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। असम प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता रंजीव कुमार शर्मा ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस अधिनियम को संसद द्वारा पहले ही पारित किया जा चुका है, जिसे वर्ष 2029 से राजनीतिक स्तर पर लागू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। इसके लागू होने के बाद लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या वर्तमान 74 से बढ़कर लगभग 273 तक पहुंचने की संभावना है, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

रंजीव कुमार शर्मा ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना और महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने इसे केवल एक कानूनी सुधार नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठाया गया कदम बताया।

उन्होंने आगे कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ देश के विकास में महिलाओं की भूमिका को सशक्त करेगा और उन्हें नीति निर्धारण, राजनीतिक नेतृत्व तथा सामाजिक परिवर्तन के केंद्र में स्थापित करेगा। यह अधिनियम लंबे समय से उपेक्षित देश की आधी आबादी को सशक्त आवाज प्रदान करने का माध्यम बनेगा।

प्रदेश भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, इस कानून के लागू होने से शासन प्रणाली अधिक समावेशी, प्रगतिशील और मजबूत बनेगी। उन्होंने इसे स्वतंत्र भारत की एक “शांत लेकिन बड़ी सामाजिक क्रांति” करार दिया और आधुनिक भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी लगभग 15 प्रतिशत और राज्यसभा में करीब 13 प्रतिशत है, जबकि 1952 की पहली लोकसभा में यह आंकड़ा मात्र 4 प्रतिशत था। इस संदर्भ में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

ज्ञात हो कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने 19 सितंबर 2023 को इस विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया था, जिसे संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पारित कर कानून का रूप दिया गया। यह कदम महिला सशक्तिकरण के अभियान को नई गति देने और देश के सामाजिक-राजनीतिक ढांचे में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।----------------

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय