पूर्व शिक्षा मंत्री जतिन माली के निधन पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने जताया शोक
गुवाहाटी, 18 अप्रैल (हि.स.)। असम आंदोलन के नेता, राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री, पलासबारी क्षेत्र के चार बार के पूर्व विधायक जतिन माली का 69 वर्ष की आयु में गुवाहाटी के डाउनटाउन अस्पताल में शुक्रवार को निधन हो गया। अपने घर पर उच्च रक्तचाप से प्रभावित होने के बाद परिवार के लोगों ने उन्हें डाउनटाउन अस्पताल में भर्ती कराया था।
असम प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और दरंग-उदालगुरी लोकसभा क्षेत्र से सांसद दिलीप सैकिया ने जतिन माली के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया। शोक संतप्त परिवारजन के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करने के साथ-साथ दिवंगत आत्मा की चिर शांति की कामना करते हुए कहा कि माली के निधन से राज्य के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। पार्टी मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन से प्रेषित गए एक बयान में प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता मानस शरणिया ने यह जानकारी दी है।
उल्लेखनीय है कि, असम आंदोलन के अग्रणी नेता जतिन माली 1985 में असम गण परिषद (अगप) पार्टी के उम्मीदवार के रूप में पलाशबारी क्षेत्र से पहली बार विधानसभा चुनाव में प्रतिस्पर्धा कर विजयी हुए थे। इसके बाद, उन्होंने 1991 और 1996 में लगातार तीन बार उसी क्षेत्र से विधायक के रूप में चयनित होकर अगप सरकार के समयकाल में दो बार शिक्षा मंत्री का दायित्व सफलतापूर्वक निभाया। हाल ही में हुए असम विधानसभा चुनाव में उन्होंने पलाशबारी क्षेत्र से नए संयुक्त मंच के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में प्रतिद्वंद्विता पेश की थी।
ऑल असम छात्र संघ (आसू) के पूर्व राज्य कार्यकारिणी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ वह दक्षिण कामरूप छात्र संघ के सलाहकार के रूप में भी जुड़े थे। असम समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले दल के सदस्य के रूप में उन्होंने असम आंदोलन के दौरान एनएसए के तहत जेल का सामना किया। उन्होंने उत्तर-पूर्वी छात्रों के संघ के पूर्व अध्यक्ष, मिर्जा स्थित शिक्षण-प्रशिक्षण महाविद्यालय के संस्थापक और प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्र में उनका उल्लेखनीय योगदान है।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

