लोस उप-चुनाव जीतने के लिए अज़मल के चरणों में कांग्रेस : असम भाजपा
-बाढ़ पीड़ित के पास गौरव गोगोई की मौजूदगी थी मात्र प्रतीकात्मक
गुवाहाटी, 13 अगस्त (हि.स.)। विधानसभा चुनाव के समय बदरुद्दीन अज़मल सांप्रदायिक थे, अब नगांव लोकसभा के उप-चुनाव से पहले अज़मल सेकुलर हो गए हैं। चार महीने पहले अल्पसंख्यकों के लिए खतरनाक माना जाने वाला एआईयूडीएफ अब अचानक अल्पसंख्यक वोटों के फायदे के लिए कांग्रेस का दिली सहयोगी हो गया है। नगांव लोकसभा उप-चुनाव धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है और अब मुसलमान वोट बैंक के एकीकरण के लिए कांग्रेस पार्टी बदरुद्दीन अज़मल के चरणों में आ गई है। रिपुन बोरा, वाजेद अली चौधरी सहित कांग्रेस नेतृत्व टीम अब दिशा खो चुके एआईयूडीएफ को सारथी बनाकर चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। यही कांग्रेस का असली चरित्र है। मुसलमानों को संतुष्ट करने की राजनीति ने असमिया और भारतीय मूल के लोगों के मन से कांग्रेस को दूर कर दिया है। अब यह दल अल्पसंख्यक वोटों का भरोसा भी खो चुका है। इसलिए पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी, जितेंद्र सिंह समेत राष्ट्रीय नेतृत्व और गौरव गोगोई, देवब्रत सैकिया, रकिबुल हुसैन, रिपुन बोरा समेत कांग्रेस के राज्य नेतृत्व को बार-बार साम्प्रदायिक और भाजपा की बी-टीम कहे जाने वाले एआईयूडीएफ के सामने अब आत्मसमर्पण करना पड़ा है।”
यह टिप्पणी आज असम प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता कमल कुमार मेधी ने की। प्रदेश भाजपा मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रवक्ता मेधी ने और कहा कि असल में कांग्रेस और एआईयूडीएफ की दोस्ती पहले से ही बरकरार है। यह दोस्ती कभी गुप्त और कभी खुलकर होती है। कलियाबर से ऊपरी असम में जब भी कोई चुनाव आता है, तब उनकी दोस्ती गुप्त रहती है और मध्य-निचले असम में चुनाव होने पर उनकी दोस्ती खुलकर सामने आती है। कांग्रेस और एआईयूडीएफ दोनों ही दल केवल एक खास समुदाय की राजनीति करते हैं। मेधी ने कहा कि कांग्रेस ने एआईयूडीएफ के साथ नगांव लोकसभा उप-चुनाव में खुलकर दोस्ती करने के साथ ही, कांग्रेस के साथ बीते विधानसभा चुनाव में मित्रता करने वाले दलों की भूमिका क्या होगी यह भी गौरतलब होगा।
भाजपा के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि ऊपरी असम के चार जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ के समय प्रभावित लोगों ने कांग्रेस पार्टी को अपने पास नहीं पाया। बाढ़ प्रभावित इलाके में गौरव गोगोई का दौरा केवल प्रतीकात्मक था। उन्होंने बाढ़ के समय राजपुत्र की तरह प्रभावितों से केवल प्रतीकात्मक रूप से ही मुलाकात की। उनके लिए बाढ़ से परेशान लोग केवल वोटर मात्र हैं। विभिन्न दलों और संगठनों की सक्रियता के विपरीत कांग्रेस पार्टी और उनके नेतृत्व की कोई सक्रियता बाढ़ प्रभावित इलाके में नहीं देखी गई।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इस बीच भाजपा के मंत्री, विधायक और विभिन्न स्तरों के कार्यकर्ता सतही राजनीति से ऊपर उठकर आपदा के समय बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए दिन-रात कार्य करते नजर आए। असम प्रदेश भाजपा के चिकित्सा कोष ने 9 अगस्त से बीते 12 अगस्त तक 47 चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मचारियों के साथ 21 चिकित्सा सहायता शिविर लगाए और बाढ़ प्रभावित मरीजों का इलाज किया। उन्होंने 2500 से अधिक मरीजों का इलाज किया। आम तौर पर बाढ़ समाप्त होने के बाद विभिन्न तरह की महामारियों से बाढ़ पीड़ित प्रभावित ग्रस्त होते हैं, हालांकि इस बार इस प्रलयकारी बाढ़ के बाद भी लोगों के महामारियों से प्रभावित न होने का मुख्य कारण है कि प्रदेश भाजपा के चिकित्सा कोष के संयोजक डॉ. प्रांजल भराली और डॉ. मृगांक तालुकदार के नेतृत्व में चिकित्सक और चिकित्सा कर्मचारियों ने यह विशेष सेवा कार्य तत्परता दिखाई।
समांतर रूप से 300 से अधिक स्वयंसेवक पिछले लगभग 25 दिनों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की सेवाएं प्रदान करने के साथ ही घरों के पुनर्निर्माण के काम में भी लगे हुए हैं। आज के संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट आशीष भराली और अर्जुन क्षेत्री भी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

