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राइजोर दल से गठबंधन तोड़कर बदरुद्दीन अजमल के कंधों पर सवार होने की कांग्रेस की परोक्ष राजनीतिक साजिश : भाजपा

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गुवाहाटी, 04 सितंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), असम प्रदेश ने दावा किया है कि कांग्रेस पार्टी द्वारा हाल ही में राइजोर दल के साथ अपने गठबंधन को समाप्त किए जाने से संबंधित कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारणीय तथ्य सामने आए हैं।

भाजपा ने कहा कि पिछले असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने विशेष रूप से ऊपरी असम के स्वदेशी एवं मूलनिवासी मतदाताओं के मतों का विभाजन रोकने के कथित उद्देश्य से राइजोर दल के साथ गठबंधन किया था। किंतु असम के स्वाभिमानी मूलनिवासी समाज ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन पर निर्णायक विश्वास व्यक्त करते हुए भारी जनादेश दिया और लगातार तीसरी बार असम में भाजपा-नीत गठबंधन सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। उस चुनाव में भाजपा गठबंधन ने अभूतपूर्व चुनावी इतिहास रचते हुए 102 सीटों पर विजय प्राप्त की, जबकि कांग्रेस पार्टी मात्र 19 सीटों तक सिमटकर रह गई। यदि मध्य असम, उत्तरी असम और ऊपरी असम के चुनाव परिणामों का सूक्ष्म अवलोकन किया जाए, तो जनादेश की व्यापकता और स्पष्टता स्वयं प्रमाणित हो जाती है। ऊपरी असम की कुल 35 विधानसभा सीटों में से भाजपा-नीत गठबंधन ने 33 सीटों पर विजय प्राप्त की, उत्तरी असम की कुल 15 सीटों में से 14 सीटें अपने नाम कीं, जबकि मध्य असम की 19 सीटों में से 14 सीटों पर भाजपा गठबंधन ने ऐतिहासिक सफलता अर्जित की।

जब असम की जनता ने कांग्रेस–राइजोर दल गठबंधन को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया, तभी वह राजनीतिक स्वप्न चकनाचूर हो गया था, जिसे लेकर कांग्रेस ने राइजोर दल के साथ गठबंधन किया था। ऐसी परिस्थिति में कांग्रेस और राइजोर दल के गठबंधन का विघटन असम की राजनीति में न तो कोई अप्रत्याशित घटना है और न ही कोई असाधारण राजनीतिक घटनाक्रम; बल्कि यह जनता द्वारा पहले ही नकारे जा चुके एक असफल राजनीतिक प्रयोग का स्वाभाविक अंत मात्र है।

किंतु आगामी नगांव लोकसभा उपचुनाव के संदर्भ में कांग्रेस पार्टी के लिए उसका वास्तविक राजनीतिक आत्मीय और स्वाभाविक सहयोगी अब मौलाना बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) प्रतीत होती है। पिछले विधानसभा चुनाव में स्वदेशी मतदाताओं को आकर्षित करने की राजनीतिक विवशता के कारण भले ही कांग्रेस ने एआईयूडीएफ के साथ औपचारिक गठबंधन नहीं किया हो, किंतु दोनों दलों के बीच लंबे समय से एक स्पष्ट, गहरा और पर्दे के पीछे चलने वाला राजनीतिक समझौता विद्यमान रहा है। इसी गुप्त राजनीतिक समझ के आधार पर, जब रिपुन बोरा असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे, तब मार्च 2020 में आयोजित राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस और एआईयूडीएफ के संयुक्त मतों के बल पर अजीत कुमार भुइयां को असम से राज्यसभा भेजा गया था। इसके बाद वर्ष 2021 के असम विधानसभा चुनाव में यही गुप्त समझ खुलकर औपचारिक गठबंधन के रूप में सामने आई। परंतु असम की जनता ने उस गठबंधन को भी पूरी दृढ़ता के साथ नकार दिया और राज्य के राजनीतिक इतिहास में नया अध्याय लिखते हुए लगातार दूसरी बार एक गैर-कांग्रेसी सरकार अर्थात भाजपा-नीत गठबंधन सरकार के पक्ष में जनादेश दिया।

असम की राजनीति में कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच गुप्त राजनीतिक सामंजस्य कोई नया घटनाक्रम नहीं है; वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव भी इस राजनीतिक समीकरण को स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है। उस चुनाव में धुबरी लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने अपने कई प्रभावशाली और मजबूत नेताओं की अनदेखी करते हुए अपेक्षाकृत कमजोर उम्मीदवार को मैदान में उतारा, जिसका प्रत्यक्ष राजनीतिक लाभ बदरुद्दीन अजमल को मिला और वे धुबड़ी से सांसद निर्वाचित हुए। ठीक इसी प्रकार, एआईयूडीएफ ने वर्तमान असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के विरुद्ध कलियाबोर लोकसभा क्षेत्र में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा और इस प्रकार उन्हें चुनावी विजय दिलाने में परोक्ष रूप से सहयोग किया। इतना ही नहीं, एआईयूडीएफ ने नगांव लोकसभा क्षेत्र सहित कुल 11 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार खड़ा न करके कांग्रेस पार्टी को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से चुनावी लाभ पहुंचाया।

धुबड़ी और कलियाबोर में दोनों दलों द्वारा एक-दूसरे को परोक्ष रूप से सहायता पहुंचाने के पीछे मूल राजनीतिक गणित अल्पसंख्यक मुस्लिम वोट-बैंक की राजनीति है। अल्पसंख्यक मुस्लिम मतों का विभाजन दोनों ही दलों के राजनीतिक हितों को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए आगामी नगांव लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी के लिए रायजोर दल की तुलना में एआईयूडीएफ का साथ कहीं अधिक चुनावी महत्त्व रखता है। यही कारण है कि कांग्रेस ने अब अखिल गोगोई का साथ छोड़कर बदरुद्दीन अजमल के कंधों पर सवार होने की बेचैनी दिखानी शुरू कर दी है। अपने राजनीतिक अस्तित्व, चुनावी गणित और तात्कालिक स्वार्थ की रक्षा के लिए कांग्रेस अब उसी एआईयूडीएफ की ओर तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है, जिससे दूरी बनाने का वह सार्वजनिक रूप से दिखावा करती रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय