home page

असम विस चुनाव 2026: रूपहीहाट विस में कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच मुकाबला

 | 
असम विस चुनाव 2026: रूपहीहाट विस में कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच मुकाबला


नगांव (असम), 22 मार्च (हि.स.)। असम विधानसभा चुनाव का दिन जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वैसे-वैसे विधानसभा क्षेत्रवार राजनीतिक हलचलों का दौर शुरू हो गया है। अल्पसंख्यक-बहुल क्षेत्र के रूप में नगांव जितला का रूपहीहाट विधानसभा क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

वर्तमान में, 56 नंबर रूपहीहाट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कांग्रेस के नुरुल हुदा कर रहे हैं। इस बार भी कांग्रेस ने इस क्षेत्र से नुरुल हुदा को ही उम्मीदवार बनाया है। इस बीच धिंग क्षेत्र के विधायक अमिनुल इस्लाम इस बार रूपहीहाट विधानसभा क्षेत्र से ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे। विधानसभा चुनाव का दिन जैसे ही करीब आ रहा है, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नुरुल हुदा और एआईयूडीएफ के मजबूत उम्मीदवार तथा वरिष्ठ विधायक अमिनुल इस्लाम के रूपहीहाट आने से यह विधानसभा क्षेत्र फिलहाल चर्चा का केंद्र बन गया है।

राज्य में परिसीमन के बाद रूपहीहाट निर्वाचन क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति में कुछ बदलाव हुए हैं। नए रूपहीहाट विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 2,31,584 है। इस क्षेत्र में मतदाताओं की जनगणना के आधार पर लगभग 92 प्रतिशत अल्पसंख्यक मतदाता और 18 हजार अन्य मतदाता हैं। नए रूपहीहाट विधानसभा क्षेत्र में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 23 है। कोलियाबोर, सामागुरी, बटद्रवा, धिंग एवं पहले के रूपहीहाट क्षेत्र समेत कुल 23 ग्राम पंचायतों से नए रूपहीहाट विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ है। परिसीमन के बाद धिंग क्षेत्र के विधायक अमिनुल इस्लाम के गृह पंचायत रूपहीहाट क्षेत्र में शामिल होने के कारण हाल ही में क्षेत्र में कांग्रेस के नुरुल हुदा के समानांतर ही अमिनुल इस्लाम भी बड़े चुनावी अभियान चला रहे हैं।

कांग्रेस से सीधे तौर पर क्षेत्र के दो बार के विधायक नुरुल हुदा के लिए इस बार एआईयूडीएफ के शक्तिशाली वरिष्ठ विधायक अमिनुल इस्लाम ने कड़ी चुनौती पैदा की है। पिछले चुनाव में मित्रता के कारण कांग्रेस के उम्मीदवार ने आसानी से जीत हासिल की थी। इन दोनों के अलावा क्षेत्र में अन्य राजनीतिक दलों से भी कई उम्मीदवारों ने अपने-अपने दल की उम्मीदवारी के लिए शुरुआत कर दी है। भाजपा-अगप गठबंधन के तहत रूपहीहाट सीट अगप के हिस्से में आई है। यहां से अगप ने जाकिर हुसैन फराजी को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस क्षेत्र में अगप से उम्मीदवार की दौड़ में वकील जाकिर हुसैन फराज़ी नाम पहले से ही काफी आगे चल रहा था।

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो रूपहीहाट की जनता ने विकास और परिवर्तन के नाम पर अगप-भाजपा गठबंधन का समर्थन किया है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर असली मुकाबला कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच होगा। 2026 के विधानसभा चुनाव में रूपहीहाट क्षेत्र में केवल धार्मिक ध्रुवीकरण ही नहीं, बल्कि केवल व्यक्तित्व की लड़ाई ही दिखाई दे रही है। इस क्षेत्र में नूरुल हुदा की निरंतरता या अमिनुल इस्लाम का नया उत्साह देखने को मिलेगा, यह रूपहीहाट की जनता अपने मताधिकार के निर्णय में निश्चित रूप से बताएगी।

उल्लेखनीय है कि, असम आंदोलन के बाद 1985 में रूपहीहाट विधानसभा क्षेत्र से यूएमएफ पार्टी के प्रत्याशी राशिदुल हक विजयी हुए थे। वहीं, 1991 और 1996 में कांग्रेस से राशिदुल हक, 2001 में कांग्रेस की शरीफा बेगम, 2006 के चुनाव में अगप के अब्दुल आज़िज, 2011 में एआईयूडीएफ के मज़िबुर रहमान विजयी हुए। वहीं, 2016 से लगातार दो कार्यकाल कांग्रेस के नुरुल हुदा रूपहीहाट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

हालिया चुनाव में कांग्रेस के नुरुल हुदा ने 1,32,091 वोट प्राप्त किए, जबकि भाजपा के नाजिर हुसैन ने 25,739 वोट प्राप्त किए। पिछले चुनाव में कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच गठबंधन के परिणामस्वरूप कांग्रेस के प्रत्याशी के सामने कोई चुनौती नहीं थी।

उल्लेखनीय है कि, रूपहीहाट विधानसभा क्षेत्र से लंबे समय तक प्रतिनिधित्व करने वाले स्वर्गीय मोहम्मद इद्रिस की बेटी शरिफा बेगम 2001 में विधायक के रूप में चुनी गई थीं और तरुण गोगोई सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री पद प्राप्त किया, हालांकि बाद के समय में परिवार अपने राजनीतिक क्षेत्र को सुरक्षित रखने में असफल रहा।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय