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असम विस चुनाव 2026: नवगठित पाका-बेतबारी क्षेत्र में कांग्रेस को एआईयूडीएफ की कड़ी चुनौती

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असम विस चुनाव 2026: नवगठित पाका-बेतबारी क्षेत्र में कांग्रेस को एआईयूडीएफ की कड़ी चुनौती


बरपेटा (असम), 19 मार्च (हि.स.)। असम में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान आगामी 9 अप्रैल को हाेगा। इसके मद्देनजर क्षेत्रवार पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। कुछ पार्टियों के उम्मीदवारों के नाम घोषित हो गये हैं, वहीं कुछ के होने वाले हैं। ऐसे में परिसीमन के बाद नवगठित 25 नंबर पाका-बेतवारी क्षेत्र में भी चुनावी तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। क्षेत्र पुनर्निर्धारण के बाद छोटे क्षेत्र को भंग कर 25 नंबर पाका-बेतवारी क्षेत्र बनाया गया है।

क्षेत्र पुनर्निर्धारण के बाद पाका-बेतवारी बनने पर क्षेत्र की भौगोलिक सीमा के साथ-साथ जनसंख्या ढांचे में भी बदलाव हुआ है। असम में क्षेत्र पुनर्निर्धारण के बाद ही राज्य के राजनीतिक माहौल में नए समीकरण की शुरुआत हुई है। अल्पसंख्यक मतदाताओं द्वारा निर्णायक भूमिका निभाए जाने वाले इस क्षेत्र में इस बार चुनाव खास होने वाला है। 2016 और 2021 में लगातार दो बार क्षेत्र से विधायक चुने गए कांग्रेस के जाकिर हुसैन सिकदार इस बार युवा नेता और अखिल भारतीय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (एआईयूडीएफ) के उम्मीदवार से कड़ी चुनौती का सामना होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं दूसरी ओर एआईयूडीएफ की प्रत्याशी मीनाक्षी रहमान जोरदार प्रचार शुरू कर चुकी हैं।

कांग्रेस के जाकिर हुसैन सिकदार के नियंत्रण वाले 25 नंबर का पाका-बेतबारी विधानसभा क्षेत्र में इस बार कांग्रेस को परेशानी होती नजर आ रही है। पहली बार चुनाव लड़कर पर्याप्त वोट हासिल करने वाली मीनाक्षी रहमान ने इस बार विधानसभा में पूरी तरह से एआईयूडीएफ की संगठनात्मक नींव मजबूत कर दी है। वह विधानसभा में लोकप्रिय नेता के रूप में पहचानी जाने लगी हैं। इस बीच कांग्रेस विधायक जाकिर हुसैन सिकदार के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ा है। अक्सर विधायक पर शासक पार्टी के साथ मित्रता करके केवल कमीशन की राशि और ठेका आदि संबंधित ठेकेदार तथा अन्य नामों के तहत भ्रष्टाचार करने के आरोप उठते रहे हैं। कांग्रेस के विधायक की कमजोरी का फायदा उठाते हुए एआईयूडीएफ की मीनाक्षी रहमान जोरदार प्रचार कर रही हैं।

उल्लेखनीय है कि, पाका-बेतबारी विधानसभा क्षेत्र के अनुमानित मतदाताओं की संख्या 2,67,873 है। इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1,38,374 है, महिला मतदाताओं की संख्या 1,29,446 और तीसरे लिंग के 3 मतदाता हैं।

असम आंदोलन के बाद 1985 में स्वतंत्र उम्मीदवार दीनबंदु चौधरी विधायक के रूप में निर्वाचित हुए। 1991 और 1996 में निज़ामुद्दीन खान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से लगातार दो बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके विपरीत, 2001 और 2006 में डॉ. ताराप्रसाद दास ने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में दो बार विधायक चुने गए।

वहीं, 2011 के विधानसभा चुनाव में अली हुसैन को ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) से विधायक चुना गया। हालांकि, 2016 और 2021 में लगातार दो बार यह क्षेत्र कांग्रेस के अधीन रहा। इन दोनों बार जाकिर हुसैन सिकदार कांग्रेस से विधायक चुने गए।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय