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असम विधानसभा चुनाव : नवगठित बोको-छयगांव सीट पर बदल रहे समीकरण,जनजातीय मतदाता निभाएंगे निर्णायक भूमिका

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असम विधानसभा चुनाव : नवगठित बोको-छयगांव सीट पर बदल रहे समीकरण,जनजातीय मतदाता निभाएंगे निर्णायक भूमिका


कामरूप, 08 मार्च (हि.स.)। सोलहवीं असम विधानसभा चुनाव-2026 का बिगुल कभी भी बज सकता है। चुनाव की आहट के साथ ही राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारियों में भी जुट गई हैं। निचले असम का प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र बोको भी इस बार नए राजनीतिक समीकरणों के कारण चर्चा में है।

क्षेत्र के पुनर्निर्धारण के बाद कामरूप जिले के पूर्व के बोको और छयगांव विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर 28 नंबर बोको-छयगांव विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया है। इस नई सीट को अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित किया गया है।

परिसीमन के कारण पुराने बोको और छयगांव क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस नए क्षेत्र में जोरदार तरीके से प्रचार अभियान चला रहे हैं, हालांकि अभी तक चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।

दरअसल, पहले बोको और छयगांव दोनों विधानसभा क्षेत्र लंबे समय तक कांग्रेस के प्रभाव में रहे हैं। बोको क्षेत्र से कांग्रेस की विधायक नंदिता दास प्रतिनिधित्व कर रही थीं, लेकिन नवगठित बोको-छयगांव सीट के अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होने के कारण वह इस क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। इसी तरह छयगांव विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे कांग्रेस के रकीबुद्दिन अहमद को भी इस नए क्षेत्र से अलग होना पड़ेगा।

परिसीमन के बाद बोको-छयगांव क्षेत्र के कई पंचायत समरिया और पलाशबाड़ी क्षेत्रों में शामिल कर दिए गए हैं। पहले बोको क्षेत्र की राजनीति में सोनतली-टुपमारी क्षेत्र के अल्पसंख्यक मतदाताओं की निर्णायक भूमिका होती थी, लेकिन परिसीमन के बाद यह जिला परिषद क्षेत्र समरिया में शामिल हो गया है।

मतदाता सूची के मसौदे के अनुसार, बोको-छयगांव विधानसभा क्षेत्र में लगभग 2,15,000 मतदाता हैं। नए जनसंख्या संतुलन के अनुसार इस बार यहां जनजातीय मतदाता चुनावी परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस सीट पर नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है। कांग्रेस की ओर से संभावित उम्मीदवारों में जनचंग जे सांगमा, गंचेंग बी सांगमा, रोमेंन सिंह राभा, रंजन राभा और लावण्या बोड़ो के नाम चर्चा में हैं। वहीं, असम गण परिषद (अगप)-भाजपा गठबंधन की ओर से अभी यह तय नहीं हुआ है कि किस पार्टी को यह सीट मिलेगी। भाजपा की ओर से गुवाहाटी महानगर के मेयर मृगेन शरणिया, राजू मेच और नगर्मल स्वर्गियारी संभावित दावेदार माने जा रहे हैं।

इसी प्रकार क्षेत्रीय दल अगप की ओर से देवेन बोड़ो और नरेन राभा के नाम भी चर्चा में हैं।

भाजपा के संभावित उम्मीदवार माने जा रहे मृगेन शरणिया की इस क्षेत्र में सक्रियता खास तौर पर देखी जा रही है। उन्होंने बोको और छयगांव मंडलों के विभिन्न इलाकों में संगठनात्मक बैठकों का आयोजन कर कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

शरणिया पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और जनता से सीधा संवाद बनाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाते हुए वे क्षेत्र में लगातार सक्रिय बने हुए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नवगठित बोको-छयगांव विधानसभा क्षेत्र से इस बार मृगेन शरणिया सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकते हैं।

परिसीमन के बाद बदले सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि इस नई सीट पर कौन-सा दल मतदाताओं का भरोसा जीतकर पहला विधायक बनने में सफल होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय