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सरकार बदरपुर किले के ऐतिहासिक महत्व से अवगत: अजंता नेओग

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गुवाहाटी, 07 जुलाई (हि.स.)। असम विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक कमलाक्ष दे पुरकायस्थ के बदरपुर किले को लेकर उठाए गए सवाल पर जवाब देते हुए पर्यटन मंत्री अजंता नेओग ने कहा कि इस ऐतिहासिक किले के महत्व से राज्य सरकार का पर्यटन विभाग अवगत है।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि पुरातत्व विभाग से मिले तथ्यों के अनुसार ऐतिहासिक बदरपुर किला असम के श्रीभूमि जिलांतर्गत बरका नदी के बाएं तट पर स्थित है। स्थानीय तथ्यों और कुछ लिखित दस्तावेजों के अनुसार इसका निर्माण कछारी राजा गोविंद चंद्र सिंह के शासनकाल में हुआ था। किले का निर्माण उत्कृष्ट ईंट से निर्मित है। किले के सामने और पिछले हिस्से में दो प्रवेश द्वार हैं। किले के चारों कोनों पर बुर्ज का निर्माण किया गया है, जिनकी उंचाई 3.77 मीटर है। प्रत्येक बुर्ज में 10 सुराख बनाए गये। इसके जरिए छोटे अस्त्रों से गोली चलाने और शत्रु की गतिविधि पर नजर रखने के लिए उपयोग में लाया जाता रहा होगा।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक पुरकायस्थ ने पूर्ववर्ती सरकारों के शासनकाल में किले के इतिहास को छिपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किले के ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाए जाए। किले के इतिहास को बताया जाए और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उपाय किये जाने चाहिए, ताकि इसको लेकर उत्पन्न भ्रांतियों का समाधान हो सके। साथ ही उन्होंने किले का निर्माण कराने वाले कछारी राजा गोविंद चंद सिंह की प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी उठाई।

मंत्री नेओग ने कहा कि यह किला 'असम प्राचीन स्मारक और अभिलेख अधिनियम, 1959' के तहत राज्य सरकार द्वारा संरक्षित और मान्यता प्राप्त ऐतिहासिक स्मारक है। यह किला कछारी राज्य के इतिहास और परंपरा से जुड़ा हुआ माना जाता है। ऐतिहासिक स्मारक होने के कारण इसके संरक्षण, पुनरुद्धार, सौंदर्यवर्धन आदि की जिम्मेदारी असम राज्य पुरातत्व विभाग के अधीन है। पर्यटन विभाग द्वारा इस ऐतिहासिक किले का प्रचार करने के उद्देश्य से इसे विभागीय प्रचार पत्रिका में शामिल किया गया है। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में किले के संरक्षण के लिए 50 लाख रुपये की पूंजी का आवंटन किया था। उन्होंने राज्य के पर्यटन को लेकर सरकार द्वारा उठाए जा रहे अन्य कई बातों का भी जिक्र किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय