मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने रास चुनाव में एआईयूडीएफ से मांगा समर्थन : गौरव गोगोई
गुवाहाटी, 06 मार्च (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष एवं लाेकसभा सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा पर असम में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) से समर्थन मांगने का आरोप लगाया है।
ज्ञात हो कि, बीते गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी। विपक्ष की ओर से किसी ने भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है। इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष के अंदर फूट एवं बिखराव का हवाला दिया है। भाजपा ने कहा कि अगर विपक्ष एकजुट होता तो एक राज्यसभा की सीट निश्चित ही उसके खाते में चली जाती, लेकिन विपक्ष में उपजे असंतोष की वजह से कोई भी पार्टी किसी दूसरे पर भरोसा नहीं कर पा रही है। इस स्थिति के लिए कांग्रेस को भाजपा ने जिम्मेदार ठहराया है।
गोगोई ने मीडिया के साथ बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि यह कदम सत्ताधारी पार्टी भाजपा के “सत्ता-केंद्रित” स्वभाव को सामने लाता है, उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने सालों तक एआईयूडीएफ को एक साम्प्रदायिक पार्टी बताया था, लेकिन अब उच्च सदन में सीट पक्की करने के लिए उसके समर्थन पर भरोसा कर रहे हैं।
गोगोई के मुताबिक, एआईयूडीएफ के तीन विधायक करीमुद्दीन बरभुइंया, निजामुद्दीन चौधरी और जाकिर हुसैन लस्कर ने नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के उम्मीदवार प्रमोद बोड़ो के नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जो यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) के अध्यक्ष भी हैं।
गोगोई ने मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ ध्रुवीकरण वाली बातें की हैं। उन्होंने दावा किया कि डॉ. सरमा अक्सर अपने राजनीतिक भाषणों में “मियां” और “ओसिनाकी” (नजान) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने बेदखली अभियानों और जिसे उन्होंने “बुलडोजर पॉलिटिक्स” बताया, उसके जरिए सामाजिक बंटवारे को और गहरा किया है।
उन्होंने तर्क दिया कि तीसरी राज्यसभा सीट के लिए एआईयूडीएफ के समर्थन पर भाजपा का भरोसा, पार्टी के खिलाफ उसके पहले के रुख के उलट है। इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए, गोगोई ने पूछा कि अगर पार्टी सच में राज्य के लिए खतरा है, तो भाजपा पार्टी एआईयूडीएफ के विधायकों पर क्यों निर्भर है।
गोगोई ने कहा, “मुख्यमंत्री अक्सर विचारधारा और सिद्धांतों के बारे में बात करते हैं, लेकिन जैसे ही उनकी सत्ता को खतरा होता है, वे सिद्धांत गायब हो जाते हैं,” और कहा कि अब अपनी राजनीतिक स्थिति को बचाना प्राथमिकता लगती है।
इस बीच, असम विधानसभा में विपक्ष के नेता, देबब्रत सैकिया ने भी इस घटनाक्रम की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह भाजपा और एआईयूडीएफ के बीच एक गुप्त समझ दिखता है। सैकिया ने दावा किया कि किसी भी विचारधारा से सार्वजनिक रूप से इनकार करने के बावजूद, पार्टियां अपने राजनीतिक हितों को बनाए रखने के लिए सहयोग करने को तैयार थीं। उन्होंने आगे एआईयूडीएफ को भाजपा की “बी-टीम” बताया और आरोप लगाया कि दोनों पार्टियों के बीच सार्वजनिक रूप से आलोचना का आदान-प्रदान वोटरों को गुमराह करने की एक रणनीति है।
उन्होंने कहा कि यूपीपीएल के एक मंत्री पहले से ही सरमा की कैबिनेट का हिस्सा हैं, लेकिन भाजपा ने अब यूपीपीएल अध्यक्ष प्रमोद बोड़ो के राज्यसभा नामांकन को आसान बनाने के लिए एआईयूडीएफ विधायकों पर भरोसा किया है।------------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

