एसोसिएशन' ने अफ्रा को लागू करने का किया समर्थन
इटानगर, 18 जून (हि.स.)। 'ऑल अरुणाचल प्रदेश प्रीस्ट वेलफेयर एसोसिएशन' ने आज 'अरुणाचल प्रदेश फ्रीडम आफ रिलिजन एक्ट (अफ्रा) 1978' (अरुणाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम) को लागू करने का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने राज्य में पारंपरिक रीति-रिवाजों को बचाने की अपील की और राज्य में ईसाई पादरियों को सरकारी मानदेय देने की मांग का कड़ा विरोध किया।
अरुणाचल प्रेस क्लब में आज आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष टटुंग टागर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की मूल आस्थाएं राज्य की पहचान, संस्कृति, रीति-रिवाजों और पारंपरिक जीवन शैली का अहम हिस्सा हैं और राज्य सरकार से अफ्रा को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तुरंत कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राज्य की अनोखी विरासत को बचाने के लिए मूल विश्वास प्रणालियों की रक्षा करना ज़रूरी है।
राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 'न्योकुम युल्लो' उत्सव के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों में आ रही कमी पर चिंता जताते हुए, एसोसिएशन ने वरिष्ठ मूल पुजारियों द्वारा किए जाने वाले पवित्र मंत्रों, प्रार्थनाओं, अनुष्ठानों और समारोहों को बचाने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ये परंपराएं पूर्वजों की समझ को दर्शाती हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से आगे बढ़ी हैं।
'न्योकुम युल्लो' एक प्रमुख कृषि उत्सव है जिसे अरुणाचल प्रदेश की 'न्यिशी' जनजाति हर साल 26 फरवरी को मनाती है। यह खेती और बागवानी उत्पादों की बेहतरी और धरती को किसी भी महामारी से बचाने के लिए मनाया जाता है।
उन्होंने सभी 'न्योकुम युल्लो' उत्सव आयोजन समितियों से अपील की कि वे अनुभवी पारंपरिक पुजारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और उत्सव के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का सही ढंग से पालन करें। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन परंपराओं को नहीं बचाया गया, तो मूल पहचान और सांस्कृतिक विरासत खत्म हो सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी

