बांध विरोधियों ने पारंपारिक पूजा कर जताया विरोध
इटानगर, 06 अक्टूबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के सियांग ज़िले में प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज़ परियोजना को लेकर तनाव बढ़ रहा है। आज बांध-विरोधी कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने उगेन्ग (रिगा) गांव में 'राफबुंग' नामक पारंपरिक 'आदि' पूजा की।
सूत्रों के अनूसार माना जाता है कि हाइड्रो-पावर परियोजना का विरोध कर रहे ग्रामीणों द्वारा आयोजित इस पारंपरिक पूजा का मकसद सीधे तौर पर स्थानीय परियोजना के समर्थकों और ज़मीन पर सर्वे करने वालों की मदद करने वालों को संदेश देना था कि पारंपरिक मान्यता के अनुसार, 'राफबुंग' की रस्म में आध्यात्मिक शक्तियों से उन लोगों पर विपत्ति और नुकसान लाने की प्रार्थना की जाती है, जिनके काम समुदाय की सामूहिक विरासत, ज़मीन और पवित्रता के लिए खतरा माने जाते हैं।
यह रस्म सियांग इलाके के गांवों में बढ़ते आपसी मतभेद को दिखाती है, जहां सरकार के इस परियोजना को लेकर समुदाय बुरी तरह बंटे हुए हैं। विरोध करने वालों को डर है कि इस बड़े प्रोजेक्ट से आदिवासियों की ज़मीन पानी में डूब जाएगी, पुश्तैनी गांव उजड़ जाएंगे और सियांग घाटी का पर्यावरण हमेशा के लिए बदल जाएगा।
वहीं, प्रोजेक्ट के समर्थक कहते हैं कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और इलाके में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए यह बांध बहुत ज़रूरी है। इस रस्म में मौजूद गांव के एक बुज़ुर्ग ने कहा, हमारी ज़मीन हमारी पहचान का अटूट हिस्सा है। जब बातचीत नाकाम हो जाती है और हम पर सर्वे का काम थोपा जाता है, तो हम अपनी पुश्तैनी ज़मीन की रक्षा करने और उसे बर्बाद करने में मदद करने वालों को जवाबदेह ठहराने के लिए अपनी पारंपरिक रस्मों का सहारा लेते हैं।
स्थानीय प्रशासन हालात पर कड़ी नज़र रे हुए है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे, क्योंकि इलाके में विरोधी गुटों के बीच भावनात्मक और सांस्कृतिक टकराव बढ़ रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी

