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राज्य के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर अरूणाचली लड़ेंगे- आपसू

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इटानगर, 14 सितंबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के लोग चकमा-हाजोंग, असम-अरुणाचल सीमा विवाद और अनुच्छेद 371(एच) से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने और राज्य के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर लड़ेंगे।

यह बातें 'ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन' (आपसू) के अध्यक्ष मेजे टाकू ने आज कही। उन्होंने कहा कि बीते रविवार को इटानगर में चकमा-हाजोंग शरणार्थी मुद्दे, असम-अरुणाचल सीमा विवाद और अनुच्छेद 371(एच) पर एक विचार-विमर्श बैठक आयोजित हुई थी।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए टाकू ने कहा कि ये मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन सरकार इन्हें सुलझाने में नाकाम रही है; अब आपसू की टीम इन सभी मुद्दों को लेकर बहुत गंभीर है।

हमने सभी संबंधित पक्षों की राय जानने के लिए यह बैठक बुलाई थी, ताकि अरुणाचल का हर नागरिक इन तीनों मुद्दों को एकजुट होकर आगे बढ़ा सके। हमें हर नागरिक का समर्थन चाहिए क्योंकि, चकमा-हाजोंग शरणार्थी समस्या, असम-अरुणाचल सीमा विवाद और भारत के संविधान के अनुच्छेद 371(एच) में संशोधन जैसे जटिल मुद्दों का समाधान खोजना एक बड़ी लड़ाई होगी।

बैठक में सर्वसम्मति से कई प्रस्ताव पारित किए गए और एक समिति बनाने का निर्णय लिया गया। इस समिति में विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल होंगे, जिनमें 'ऑल इंडिजिनस ट्राइबल फोरम', कम्युनिटी बेस्ड ऑर्गनाइज़ेशन, कम्युनिटी बेस्ड स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन, ज़िला छात्र संघ, राजनीतिक दल, आपसू के पूर्व नेता और राज्य के अन्य संबंधित पक्ष शामिल होंगे और सब मिलकर लड़ेंगे।

इसके साथ ही, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के साथ बातचीत और बैठकों का सिलसिला शुरू किया जाएगा और एक जन-रायशुमारी (मास रेफरेंडम) भी आयोजित किया जाएगा।

हम सभी जानते हैं कि यह एक लंबे समय से लंबित और जटिल मुद्दा है। इस लड़ाई में आपसू को नेतृत्व करना चाहिए और हमें पिछली गलतियों से सबक लेना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी