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कांग्रेस के पेपर लीक और बेरोज़गारी के विरूद्ध देशव्यापी अभियान में एपीसीसी शामिल

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इटानगर, 20 जून (हि.स.)। इंडियन नेशनल कांग्रेस द्वारा पेपर लीक, बढ़ती बेरोज़गारी और बार-बार होने वाले परीक्षा घोटालों का आरोप लगाते हुए पार्टी द्वारा शुरू किए गए देशव्यापी अभियान में शामिल होते हुए अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से जवाबदेही की मांग की और एक मज़बूत व पारदर्शी शिक्षा नीति की वकालत की।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पिछले 10 सालों से 'वोट चोरी से लेकर पेपर चोरी' और 'सिलेक्शन से लेकर रिजेक्शन' (चयन से अस्वीकृति) के अलावा कुछ नहीं कर रही है।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता जॉनी यानफो ने कहा कि जो सरकार निष्पक्ष परीक्षा आयोजित नहीं कर सकती, वह भारत का भविष्य संवारने का दावा नहीं कर सकती।

बेरोज़गार युवाओं और छात्रों के भविष्य पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का आधार योग्यता (मेरिट) होती है, लेकिन जब प्रश्न पत्र लीक हो जाते हैं, उनमें हेरफेर की जाती है या उनकी सुरक्षा से समझौता किया जाता है, तो सत्ता और पैसे के प्रभाव में लाखों ईमानदार छात्र इसका शिकार बन जाते हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट),कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट जैसी परीक्षाएं आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को भंग करने की विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मांग का समर्थन करते हुए, एपीसीसी ने ज़िला कांग्रेस कमेटी को निर्देश दिया कि वे अगले हफ़्ते राज्य भर में ज़िला-स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस और जन-प्रतिनिधित्व कार्यक्रम आयोजित करें।

कमेटी ने आरोप लगाया कि छात्र और युवा प्रशासनिक विफलता, भ्रष्टाचार और संस्थागत पतन के सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं; साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल में अब तक 89 बार पेपर लीक की घटनाएं हो चुकी हैं।

एपीसीसी ने ज़ोर देकर कहा कि भारत का भविष्य लीक हुए पेपर, रद्द हुई परीक्षाओं, रुकी हुई भर्तियों और टूटे हुए वादों के आधार पर नहीं बनाया जा सकता। साथ ही, उन्होंने इन मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए, जिन्हें उन्होंने भारत के युवाओं के भविष्य पर सीधा असर डालने वाला बताया।

उन्होंने कहा कि इस समय छात्रों का आंदोलन पूरे देश में चल रहा है। अगला 'छात्रों की गूंज' आंदोलन क्रमश 10 जुलाई (इलाहाबाद), 11 जुलाई (पटना) और 14 जुलाई (दिल्ली) को होगा। राहुल इस आंदोलन का नेतृत्व 'शिक्षा बचाओ, अपना भविष्य बचाओ' और 'आपकी शिक्षा, आपका भविष्य, आपकी लड़ाई' जैसे नारों के साथ कर रहे हैं। एपीसीसी ने युवा संगठनों, नागरिक समाज, शिक्षकों और समान विचारधारा वाले नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और शिक्षा व रोज़गार के क्षेत्र में बढ़ते संकट के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाएं।

एपीसीसी की मांगों में परीक्षाओं में बार-बार होने वाली अनियमितताओं की व्यापक और पारदर्शी जांच, पेपर लीक रैकेट में शामिल सभी लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जवाबदेही बहाल करने के लिए ढांचागत सुधार, परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया का समय पर आयोजन, छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा और देश के शिक्षण संस्थानों में भरोसा बहाल करना शामिल है।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी