एपीसीसी ने राज्यपाल के ज़रिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपकर असम बाढ़ को 'राष्ट्रीय समस्या' घोषित करने की मांग की
गुवाहाटी, 12 अगस्त (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के राहत और पुनर्वास विभाग के चेयरमैन प्रांजित दास के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज असम के राज्यपाल। लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात की। उन्होंने मांग की कि राज्य में बार-बार आने वाली भीषण बाढ़ और नदी के कटाव के संकट को तुरंत राष्ट्रीय समस्या घोषित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के अनुसार, असम के लोग दशकों से बाढ़ और नदी के किनारों के भीषण कटाव के कारण हर साल भारी नुकसान झेल रहे हैं। राज्य के कुल ज़मीन के हिस्से का लगभग 40% (यानी करीब 31.05 लाख हेक्टेयर) बाढ़ की चपेट में रहता है—जो राष्ट्रीय औसत 10.2% से काफी ज़्यादा है। ब्रह्मपुत्र और बराक नदी घाटियों में भारी गाद जमा होने, मॉनसून की तेज़ बारिश, नदियों की उथली तलहटी, तटबंध टूटने और जलवायु परिवर्तन के असर ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। नतीजतन, किसानों, दिहाड़ी मज़दूरों और चाय बागान के कर्मचारियों समेत लाखों लोगों की आजीविका बर्बाद हो रही है और अनगिनत परिवार हमेशा के लिए बेघर हो रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने ज़ोर देकर कहा कि इस संकट का दायरा और बार-बार होने वाली प्रकृति राज्य सरकार की क्षमता से कहीं ज़्यादा है। इसलिए, एक स्थायी और वैज्ञानिक समाधान पाने के लिए, उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार तुरंत इस संकट को राष्ट्रीय समस्या के तौर पर मान्यता दे। ज्ञापन में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स बनाने की अपील की गई। इसके अलावा, विस्थापित परिवारों के लिए नदी के बहाव को नियंत्रित करने, तटबंधों को मज़बूत करने, वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग (गाद निकालना), रियल-टाइम बाढ़ की भविष्यवाणी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और सुनियोजित पुनर्वास को शामिल करते हुए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने के लिए पर्याप्त केंद्रीय फंड देने की मांग की गई।
ज्ञापन में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के एकीकृत प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के बीच प्रभावी तालमेल की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया। प्रतिनिधिमंडल का मानना था कि सिर्फ़ अस्थायी राहत से इस लंबे समय से चले आ रहे संकट का स्थायी समाधान नहीं मिल सकता। इस प्रकार, असम के लोगों के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने के लिए, प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द यह ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय ले।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

