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एसीएफ ने अफ्रा खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखने का किया फैसला

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इटानगर, 21 अप्रैल (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1978 (अफ्रा) के कार्यान्वयन और नियमों के निर्माण का विरोध कर रहे अरुणाचल क्रिस्चियन फोरम (एसीएफ) ने राज्य सरकार के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।

मंगलवार को अरुणाचल प्रेस क्लब में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए अरुणाचल क्रिस्चियन फोरम के अध्यक्ष जेम्स तेची तारा ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1978 (अफ्रा) के नियमों के निर्माण और इसके लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के विरोध में हमने कई बार आवेदन प्रस्तुत किए हैं, लेकिन राज्य सरकार ने हमारी अपीलों को अनसुना कर अरुणाचल प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1978 के नियमों के निर्माण के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है।

हमारी मांग अधिनियम को निरस्त करने की है, इसलिए उच्च स्तरीय समिति के गठन का कोई अर्थ नहीं है, क्योंकि धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1978 दोषपूर्ण है और पूरी तरह से ईसाई समुदाय के खिलाफ है। हमारा मानना है कि इस कानून का इस्तेमाल ईसाई समुदाय के उत्पीड़न के हथियार के रूप में किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि हमारे एसीएफ सदस्यों ने विरोध जताते हुए आज की उच्चाधिकार समिति की बैठक से वॉकआउट कर दिया। तारा ने यह भी दावा किया कि उच्चाधिकार समिति के अधिकांश सदस्य एपीएफआरए-1978 के समर्थक हैं।

एसीएफ ने नियम बनाने के लिए एचपीसी की बैठक के विरोध में 30 अप्रैल को धरना देने का फैसला किया है।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी