आनसू ने राज्य सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा कार्य को समय पर पूरा करने की उठाई मांग
इटानगर, 08 जुलाई (हि.स.)। ऑल निशी स्टूडेंट्स यूनियन (आनसू) ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू को एक ज्ञापन सौंपकर राज्य सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचे और सड़क संपर्क से जुड़े सात अहम मुद्दों पर तय समय-सीमा के भीतर कार्रवाई करने की मांग की है।
आनसू के अध्यक्ष अशोक डोका और महासचिव माई आराम कामरिर के हस्ताक्षर वाले ज्ञापन में यूनियन ने केयी पान्योर जिले में एक सरकारी बैचलर ऑफ़ एजुकेशन कॉलेज खोलने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि कई नए जिले बनने के बावजूद, अरुणाचल प्रदेश में अभी भी कोई ऐसा सरकारी संस्थान नहीं है जो बैचलर ऑफ एजुकेशन प्रोग्राम चलाता हो।
यूनियन ने कहा कि शिक्षक बनने के इच्छुक लोगों को मजबूरन निजी संस्थानों से यह कोर्स करना पड़ता है, जिसमें काफी ज़्यादा खर्च आता है। इससे किफायती प्रोफेशनल टीचर एजुकेशन तक पहुंच सीमित हो जाती है।
आनसू ने पाक्के केसांग जिले में दिव्यांग बच्चों के लिए एक सरकारी स्कूल खोलने की भी मांग की। यूनियन ने कहा कि प्रस्तावित संस्थान में ट्रेंड स्पेशल एजुकेटर, थेरेपिस्ट, समावेशी क्लासरूम, हॉस्टल की सुविधा, वोकेशनल ट्रेनिंग और रिहैबिलिटेशन सर्विस होनी चाहिए, ताकि दिव्यांग बच्चों को अच्छी शिक्षा और मदद मिल सके।
छात्र संगठन ने सरकार से मौजूदा एकेडमिक सेशन के दौरान टूर इंजीनियरिंग कॉलेज को चालू करने का भी आग्रह किया। संगठन ने कहा कि हालांकि, इस संस्थान की नींव 2015 में रखी गई थी, लेकिन अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं हुई है। इससे छात्र राज्य के भीतर किफायती इंजीनियरिंग शिक्षा से वंचित रह गए हैं और कुशल टेक्निकल मैन पावर के विकास पर भी असर पड़ा है।
बुनियादी ढांचे के मामले में, आनसू ने होज-पोटिन-पोसा सड़क के स्थायी पुनर्निर्माण के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की मांग की और इसके जल्द कार्यान्वयन के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से सहयोग का अनुरोध किया। यूनियन ने कहा कि हालिया बाढ़ से सड़क को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे ट्रांसपोर्ट और ज़रूरी सामान व सेवाओं की आवाजाही बाधित हुई है।
यूनियन ने यह भी मांग की कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय को असम के तेजपुर से इटानगर में 30 दिनों के भीतर स्थानांतरित किया जाए। यूनियन का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण प्रशासनिक देरी होती है और अरुणाचल प्रदेश में केंद्र द्वारा वित्तपोषित सड़क परियोजनाओं के कार्यान्वयन और निगरानी में तालमेल पर असर पड़ता है।
हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी

