अंबुबासी मेले के आयोजन को लेकर कामरुप (मेट्रो) जिला प्रशासन की तैयारी पूरी
गुवाहाटी, 18 जून (हि.स.)। मां कामाख्या मंदिर परिसर में आगामी 22 जून से आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध अंबुबासी मेले को लेकर सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मेले के आयोजन को लेकर की गई तैयारियों के संबंध में आज कामरुप (मेट्रो) जिला प्रशासन ने विस्तार से जानकारी साझा की।
कामाख्या देवालय में कामरूप महानगर जिला आयुक्त स्वप्निल पाल ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान कामाख्या देवालय के मुख्य दलै (प्रधान पुजारी) कबिन्द्र शर्मा, ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी जयंत सारथी बोरा भी विशेष रूप से मौजूद रहते हुए उन्होंने भी अपनी बातें साझा की।
मुख्य दिशा-निर्देश और व्यवस्थाएं:
मंदिर के कपाट बंद रहने का समय: अंबुबासी महायोग की प्रवृत्ति (शुरुआत) 22 जून की रात 09 बजकर 08 मिनट 42 सेकंड पर होगी। इसके बाद 23, 24 और 25 जून को मंदिर के कपाट पूरी तरह से बंद रहेंगे। 26 जून की सुबह मां कामाख्या के स्नान और नित्य पूजा संपन्न होने के बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे।
विशेष दर्शन पर रोक: आगामी 26 और 27 जून को ₹501 शुल्क वाले विशेष दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह बंद रहेगी।
वीआईपी दर्शन बंद: मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए 21 जून से 30 जून तक सभी प्रकार के वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन की व्यवस्था निलंबित रहेगी।
रहने और भोजन पर पाबंदी: इस बार नीलाचल पहाड़ और उसके आसपास के क्षेत्रों में तीर्थयात्रियों के ठहरने (लॉजिंग) या भोजन की कोई व्यवस्था नहीं होगी। साथ ही, परिसर में किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री के वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
यात्रियों के लिए सुविधाएं: कामाख्या की तलहटी से आने वाले पैदल मार्गों और मोटर मार्ग के बीच-बीच में श्रद्धालुओं के लिए चिकित्सा सेवा, पेयजल और विश्राम गृहों (रेस्ट शेल्टर) की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी।
निकास व्यवस्था: अंबुबासी के दौरान मंदिर की परिक्रमा करने के बाद सभी श्रद्धालुओं को केवल पूर्वी द्वार (पूरब दुवार) से ही बाहर निकलने की अनुमति होगी।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था: कानून-व्यवस्था और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देवालय के अपने 120 स्थायी सुरक्षाकर्मी, 500 स्काउट-गाइड, 200 स्वयंसेवक और 250 अस्थायी सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मंदिर परिसर और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
स्वच्छता व्यवस्था: मंदिर परिसर की साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए देवालय के अपने 300 स्थायी सफाई कर्मियों के अलावा 200 अस्थायी सफाई कर्मियों को विशेष रूप से नियुक्त किया जाएगा।
टोकन व्यवस्था और विश्राम गृह: 26 जून को मां के दर्शन के लिए जुटने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु 'बंशीबागान' में अस्थायी विश्राम गृह, चिकित्सा सेवा, शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, 26 और 27 जून को दर्शन के लिए उक्त स्थान पर क्रमानुसार टोकन देने की व्यवस्था रहेगी।
सेवा प्रदाताओं के लिए भोजन: अंबुबासी मेले के दौरान अपनी सेवाएं देने वाली विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों के लिए देवालय प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई है।
पहाड़ पर प्रवेश का समय: पिछले वर्ष भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए इस बार नियम कड़े किए गए हैं। श्रद्धालु रात को केवल 9:00 बजे तक ही नीलाचल पहाड़ पर प्रवेश कर सकेंगे। इसके बाद प्रवेश बंद रहेगा और पुनः सुबह 5:00 बजे से प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। देवालय ने इसमें आम जनता से सहयोग की कामना की है।
जूते-चप्पल रखने की व्यवस्था: चूंकि देवालय परिसर के आसपास जूते-चप्पल रखने की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे अपने जूते-चप्पल नीचे कामाख्या के फ्लाईओवर (उड़ान पुल) के नीचे ही रखकर पहाड़ पर आएं। ऐसा न करने पर यदि जूते-चप्पल खो जाते हैं, तो इसके लिए देवालय प्राधिकारी या प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।
अंबुबासी के दौरान होने वाली अत्यधिक भीड़ को देखते हुए छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, वृद्धों और अस्वस्थ (बीमार) व्यक्तियों से विनम्र अनुरोध किया गया है कि वे यथासंभव इस दौरान आने से बचें।
तंबाकू और मादक द्रव्य मुक्त क्षेत्र: चूंकि नीलाचल पहाड़ एक पूर्णतः तंबाकू मुक्त क्षेत्र है, इसलिए इस विषय में सभी पक्षों से सहयोग की अपेक्षा की गई है। साथ ही, परिसर में किसी भी प्रकार के मादक द्रव्यों (नशीले पदार्थों) के सेवन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
नशीले पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध (निरंतरता): प्रशासन ने कड़ा निर्देश दिया है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार के मादक द्रव्य या तंबाकू का सेवन करके देवालय परिसर में प्रवेश न करे। इस नियम का सख्ती से पालन करने का विशेष अनुरोध किया गया है।
सहयोग की अपील: अंबुबासी महायोग के इस पावन अवसर पर मंदिर प्रबंधन ने सभी स्थानीय नागरिकों और बाहर से आने वाले तीर्थयात्रियों से व्यवस्था बनाए रखने में पूर्ण सहयोग की कामना की है।
प्रशासन से 24 घंटे सेवाओं की मांग: मेले के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए देवालय प्रबंधन ने स्थानीय प्रशासन से अनुरोध किया है कि तीर्थयात्रियों के लिए 24 घंटे पेयजल, निर्बाध बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं, शौचालय, साफ-सफाई और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पैदल मार्ग पर व्यवस्थाएं और रूट चार्ट: तलहटी (नामनि कामाख्या) गेट से ऊपर मंदिर तक जाने वाले पूरे पैदल मार्ग पर कारपेट बिछाई गई है और साथ ही पीने के पानी की उचित व्यवस्था की गई है।
भक्तों के लिए प्रवेश मार्ग: सभी श्रद्धालु नर्सरी (तलहटी कामाख्या) से ऊपर चढ़कर त्रिनाथ मंदिर होते हुए, फिर नाहरबारी और बंशीबागान के रास्ते से मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / देबजानी पतिकर

