कृषि मंत्री पीयूष ने कृषि महाविद्यालय के 79वें स्थापना दिवस समारोह में लिया हिस्सा
जोरहाट, 16 अगस्त (हि.स.)। असम के कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने शनिवार को असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट के कृषि महाविद्यालय के 79वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया।
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री हजारिका ने कहा कि कृषि क्षेत्र के सभी स्नातकों को सरकारी क्षेत्र में नौकरी देना संभव नहीं है। इसलिए युवाओं को केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर सफल किसान और एग्री-प्रेन्योर बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा बागवानी के माध्यम से एक सामान्य सरकारी नौकरी की तुलना में अधिक आय अर्जित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक समाज में खेती को केवल आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का पेशा समझने की धारणा समाप्त नहीं होगी, तब तक कृषि क्षेत्र का वास्तविक विकास संभव नहीं है।
हजारिका ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के निर्देश पर कृषि विभाग राज्य के 50 कॉलेजों में कृषि संबंधी कार्यशालाएं आयोजित करेगा। उन्होंने इस पहल को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए असम कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारियों और शिक्षकों से सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही शिक्षा विभाग और कृषि विभाग के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि कृषि विभाग राज्यभर में पांच करोड़ उच्च मूल्य वाले फलों के पौधे वितरित करेगा। उन्होंने किसानों को सहयोग देने के लिए असम कृषि विश्वविद्यालय से सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने छात्रों से मखाना की खेती को लोकप्रिय बनाने में आगे आने की भी अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार मुख्यमंत्री के असम को एक अग्रणी कृषि राज्य बनाने के विजन को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। हाल में बाढ़ प्रभावित चार जिलों में धान के पौधे और बागवानी के पौधे तेजी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
समारोह में असम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दीपज्योति राजखोवा, माधवदेव विश्वविद्यालय के कुलपति अरूपज्योति चौधरी, सांसद कामाख्या प्रसाद तासा तथा विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी, रूपज्योति कुर्मी और धीराज गोवाला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समारोह के बाद मंत्री हजारिका ने विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण किया और विभिन्न कृषि अनुसंधान एवं प्रदर्शन परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने उच्च उत्पादकता वाली धान की खेती, बीज अनुसंधान, जलवायु-अनुकूल एकीकृत कृषि प्रणाली, ‘अमृत सरोवर’ परियोजना, एकीकृत धान-सह-मछली पालन मॉडल और कृषि-मौसम विज्ञान वेधशालाओं का जायजा लिया।
मंत्री ने कृषि के आधुनिकीकरण, अनुसंधान के विस्तार और किसानों को अधिक उत्पादक एवं आत्मनिर्भर बनाने में असम कृषि विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

