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अरुणाचली प्रदर्शनकारियों साथ कथित दुर्व्यवहार और उनकी हिरासत की फ्रंट ने की निंदा

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इटानगर, 02 नवंबर (हि.स.)। अरुणाचल फ्रंटियर ट्राइबल फ्रंट ने नई दिल्ली में प्रस्तावित 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' (सुमफ) के खिलाफ हुए हालिया विरोध प्रदर्शन के दौरान, दिल्ली पुलिस द्वारा अरुणाचल प्रदेश के प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार और उनकी हिरासत की कड़ी निंदा की है।

आज यहां अरुणाचल प्रेस क्लब में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, फ्रंट के अध्यक्ष तादक नालो ने दिल्ली पुलिस द्वारा अरुणाचल के लोगों के साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत का अभिन्न अंग होने के बावजूद, इस राज्य के लोगों के साथ अपनी आवाज़ उठाने पर आतंकवादियों जैसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है?

उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद राज्य के प्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी निराशा जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रतिनिधियों के सार्वजनिक बयानों में लोगों की चिंताओं को दूर करने के बजाय, बांध परियोजना को जारी रखने पर ही ज़्यादा ज़ोर दिया गया है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और अन्य राजनीतिक नेताओं के बयानों का ज़िक्र करते हुए, फ्रंट ने सवाल किया कि क्या वे अरुणाचल प्रदेश को बेचने के लिए दिल्ली गए थे? उन्होंने 'सियांग बेल्ट' के लोगों की आवाज़ दबाने और विकास के नाम पर उन्हें उनकी पुश्तैनी ज़मीन से बेदखल करने की कोशिशों पर भी चिंता जताई।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मौजूदा हालात राजनीतिक नेतृत्व की गलत नीतियों का नतीजा हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जनता की भावनाओं को लगातार नज़रअंदाज़ किया गया, तो राज्य में और ज़्यादा अशांति फैल सकती है। ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारत के शोषण का उदाहरण देते हुए, फ्रंट ने सवाल किया कि क्या अरुणाचल प्रदेश के हितों और अधिकारों के साथ समझौता किया जा रहा है?

फ्रंट ने राज्य की राजधानी और पूरे अरुणाचल प्रदेश में एक आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि पिछली बैठक में लिए गए एक प्रस्ताव के अनुसार, 8 नवंबर को सुबह 9 बजे इटानगर के डीके कन्वेंशन हॉल में सभी संबंधित पक्षों (स्टेक होल्डर्स) के साथ एक परामर्श बैठक आयोजित की जाएगी।

इस प्रस्तावित बैठक में न केवल परियोजना के मुद्दे पर, बल्कि राज्य से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होगी, जिसमें तक्सिंग इलाके में चीन द्वारा कथित तौर पर ज़मीन पर कब्ज़ा करने का मामला भी शामिल है। फ्रंट ने सभी राजनीतिक दलों, छात्र संघों, कॉलेज के छात्रों और अन्य हितधारकों से बैठक में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से 'जेन-जी' (युवा पीढ़ी) से आगे आने का आग्रह किया है, क्योंकि युवा ही अरुणाचल प्रदेश का भविष्य हैं।

फ्रंट ने फिर से दोहराया है कि अरुणाचल प्रदेश के लोगों की आवाज़, उनके अधिकारों और चिंताओं को सुना जाना चाहिए और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी