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व्यवहार्यता रिपोर्ट पूरी होने के बाद परियोजना का शुरू होगा काम

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इटानगर, 29 सितंबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को कहा कि प्रस्तावित सियांग अपर मल्टी-पर्पज प्रोजेक्ट को तब तक आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, जब तक कि शुरुआती व्यवहार्यता रिपोर्ट पूरी होने के बाद विशेषज्ञ इसे तकनीकी रूप से व्यावहारिक न मान लें। उन्होंने बोलेंग में सियांग जिले के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही।

खांडू ने कहा कि सरकार इस बड़े प्रोजेक्ट को व्यवहार्यता चरण से आगे जल्दबाजी में नहीं ले जाना चाहती और इस बात पर जोर दिया कि यह तय करने के लिए पीएफआर जरूरी है कि प्रस्तावित ढांचा कहां और कैसे विकसित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, अगर रिपोर्ट के बाद विशेषज्ञ यह तय करते हैं कि प्रोजेक्ट नहीं बनाया जा सकता है, तो आगे कोई प्रक्रिया नहीं होगी। जो नवंबर से जनवरी तक तीन महीनों में किए जाने की उम्मीद है, प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता, स्थान और तकनीकी पहलुओं के बारे में स्पष्टता प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि अध्ययन में यह जांच की जाएगी कि क्या अरुणाचल प्रदेश के भूकंपीय क्षेत्र पांच में ऐसा ढांचा तकनीकी रूप से व्यावहारिक है, यह ऊपरी इलाकों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में कितनी सुरक्षा प्रदान कर सकता है और क्या निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध है।

खांडू ने कहा कि यदि इसे व्यावहारिक पाया जाता है, तो प्रोजेक्ट को बाद में लागू कानूनों और प्रक्रियाओं के अनुसार सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन और विस्तृत परियोजना रिपोरत करने की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल एक पारंपरिक जलविद्युत परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक महत्व वाली राष्ट्रीय परियोजना के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसलिए, प्रस्तावित परियोजना की वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से जांच की जानी चाहिए, न कि बिना पर्याप्त मूल्यांकन के इसे स्वीकार या अस्वीकार किया जाना चाहिए।

खांडू ने आश्वासन दिया कि यदि परियोजना व्यवहार्यता चरण से आगे बढ़ती है, तो प्रभावित समुदायों के साथ व्यापक परामर्श किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एक बार तकनीकी रूप से व्यावहारिक स्थान की पहचान हो जाने के बाद, सरकार ग्राम पंचायतों, गांवों और स्थानीय समुदायों के साथ बातचीत करेगी और परियोजना के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रभावित गांवों से पुनर्वास के बारे में परामर्श किया जाएगा, जिसमें स्थानों का चयन भी शामिल है, जबकि अधिग्रहित भूमि के लिए मुआवजा लागू नियमों के अनुसार दिया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी