एलजीबीआई एयरपोर्ट ने इंटीग्रेटेड रेनवाटर हार्वेस्टिंग और इस्तेमाल की पहल के ज़रिए पानी की सस्टेनेबिलिटी को दिया बढ़ावा
गुवाहाटी, 12 अगस्त (हि.स.)। अपने सस्टेनेबिलिटी एजेंडा और 'वॉटर पॉजिटिव' लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता के तहत, गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलोई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एलजीबीआई) ने पूरे एयरपोर्ट इकोसिस्टम में इंटीग्रेटेड वॉटर मैनेजमेंट अप्रोच के ज़रिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग और उसके इस्तेमाल पर अपना ध्यान और मज़बूत किया है।
अदानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (एएएचएल) प्रबंधन ने आज बताया है कि गुवाहाटी में हर साल लगभग 1,800–2,200 एमएम बारिश होती है, जिससे बारिश का पानी एयरपोर्ट के सबसे कीमती प्राकृतिक संसाधनों में से एक बन जाता है। बीते 9 अगस्त तक एयरपोर्ट पर लगभग 1,320 एमएम बारिश हो चुकी है, जो बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने वाली समस्या से बदलकर पानी के एक टिकाऊ स्रोत में बदलने का एक बड़ा मौका देती है।
इस पहल के तहत, एलजीबीआई एयरपोर्ट पर बारिश का पानी जमा करने के लिए दो बड़े टैंक हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,000 केएल है। जमा किए गए बारिश के पानी को एयरपोर्ट के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) में ट्रीट किया जाता है और फिर इसका इस्तेमाल कई तरह के कामों में किया जाता है, जैसे पीने के पानी के फ़ाउंटेन, इक्विपमेंट की सफ़ाई और कूलिंग टावर में पानी की ज़रूरत पूरी करना। पीने लायक बनाने के लिए, ट्रीट किए गए पानी को एडवांस्ड मल्टी-स्टेज ट्रीटमेंट और प्यूरिफ़िकेशन प्रोसेस से गुज़ारा जाता है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि पानी पीने के लिए तय क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा उतरे।
अकेले जुलाई 2026 में, नए बने अत्याधुनिक टर्मिनल 2 में इस्तेमाल होने वाले कुल पानी का लगभग 28% हिस्सा बारिश के जमा किए गए पानी से पूरा किया गया। यह इस पहल की बड़ी क्षमता को दिखाता है कि कैसे बाहरी पानी के स्रोतों पर निर्भरता कम करते हुए उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस मिले-जुले नज़रिए में इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस (ईएंडएम), ईएसजी, ऑपरेशन्स और प्रोजेक्ट्स टीमों के बीच करीबी तालमेल शामिल है, जिससे बारिश के पानी को इकट्ठा करके, उसे ट्रीट करके एयरपोर्ट के कई कामों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और मौजूदा व भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को देखते हुए, उम्मीद है कि यह पहल एयरपोर्ट की बढ़ती पानी की ज़रूरतों को टिकाऊ तरीके से पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी।
एलजीबीआई एयरपोर्ट पर बारिश के पानी को इकट्ठा करने और उसके इस्तेमाल की पहल, एएएचएल नेटवर्क में अपनी तरह का पहला इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट है। इससे गुवाहाटी एयरपोर्ट टिकाऊ जल प्रबंधन के मामले में एक मिसाल बन गया है। इस पहल में एएएचएल नेटवर्क के दूसरे एयरपोर्ट्स पर भी इसे लागू करने के लिए एक बेंचमार्क बनने की क्षमता है।
ऐसी पहलों के ज़रिए, एलजीबीआई एयरपोर्ट ज़िम्मेदार संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण की देखभाल और एक ज़्यादा मज़बूत व टिकाऊ एयरपोर्ट इकोसिस्टम बनाने के अपने संकल्प को लगातार मज़बूत कर रहा है। दुनिया के सबसे खूबसूरत एयरपोर्ट्स में से एक माने जाने वाले एलडीबीआई एयरपोर्ट ने यह साबित किया है कि सुंदरता और टिकाऊपन साथ-साथ चल सकते हैं-एक ऐसा एयरपोर्ट जो न सिर्फ़ लोगों को प्रेरित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, बल्कि जिसे टिकाऊ भविष्य के मज़बूत संकल्प के साथ बनाया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

