भाजपा प्रदेश कार्यालय में राष्ट्रवादी राजनीति और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर चर्चा
गुवाहाटी, 30 सितंबर (हि.स.)। गुवाहाटी स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन में बुधवार को “राष्ट्रवादी राजनीति और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” विषय पर चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में असम के प्रमुख आरएसएस कार्यकर्ता तीर्थंकर दास कलिता ने वक्ता के रूप में विचार रखे। सत्र का शुभारंभ भाजपा के मुख्य प्रवक्ता किशोर उपाध्याय ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए वक्ता का परिचय कराया।
कलिता ने राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणाओं तथा भारतीय सभ्यतागत दृष्टिकोण में उनके स्थान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने राष्ट्र, धर्म और संस्कृति जैसे शब्दों के अर्थ समझाते हुए कहा कि अंग्रेजी के ‘नेशन’, ‘रिलिजन’ और ‘कल्चर’ शब्द इनके अर्थों को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाते।
उन्होंने भारत की ऐतिहासिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सभ्यतागत दृष्टिकोण में शासकों और राजाओं को भी कानून के अधीन माना जाता था। उन्होंने सामूहिक कल्याण तथा सभ्यतागत राष्ट्रवाद की अवधारणा पर भी जोर दिया।
कलिता ने जनजातीयता, क्षेत्रवाद और राष्ट्रवाद के बीच अंतर पर चर्चा करते हुए जनजातीय समुदायों पर ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों के प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि औपनिवेशिक शासन ने इन समुदायों का शोषण किया, उन्हें अलग-थलग किया और विभिन्न श्रेणियों में बांटा। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस सरकार के दौरान भी अलग-अलग रूपों में ऐसी प्रवृत्तियां जारी रहीं।
उन्होंने भाजपा की अंत्योदय अवधारणा को विकेंद्रीकरण तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के व्यापक विचार से जोड़कर समझाया। राष्ट्रवाद के विकास का उल्लेख करते हुए कलिता ने कहा कि आधुनिक पश्चिमी राजनीतिक संदर्भ में राष्ट्रवाद अपेक्षाकृत नई अवधारणा है, जबकि भारत में उनकी दृष्टि से भौगोलिक विविधता के बावजूद ऐतिहासिक रूप से एक साझा सभ्यतागत पहचान रही है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की व्याख्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने असम में बसे एक बंगाली परिवार द्वारा अपने बच्चे का नाम “सोमनाथ” रखने का उदाहरण दिया। उन्होंने इसे क्षेत्रीय सीमाओं से परे भारत की सांस्कृतिक कड़ियों का उदाहरण बताया।
कलिता ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” की अवधारणा और वर्तमान समाज में उसकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा की। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य “सत्यमेव जयते” का उल्लेख करते हुए इसके उपनिषद से उद्भव की जानकारी दी तथा भारतीय सभ्यतागत परंपराओं, हिंदुत्व और संवैधानिक व्यवस्था के बीच संबंधों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर सवाल किए और कलिता ने उनके जवाब दिए। मुख्य प्रवक्ता किशोर उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन किया और चर्चा में विचार साझा करने के लिए कलिता तथा कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

