आधुनिक मशीनों की मदद से कचरा ट्रांसफर सेंटर का आदाबाड़ी में निर्माण
गुवाहाटी, 03 नवंबर (हि.स.)। गुवाहाटी के कचरा प्रबंधन को और अधिक आधुनिक, सुसंगत और प्रभावी बनाने के लिए आदाबाड़ी में अत्याधुनिक रिफ्यूज ट्रांसफर स्टेशन सह मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी का निर्माण किया गया है। गुवाहाटी महानगर निगम (जीएमसी) की पहल पर लगभग 18.72 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना के काम की जिम्मेदारी मेसर्स रशा इंफ्रास्ट्रक्चर के पास है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के मार्गदर्शन और गुवाहाटी महानगर निगम की पहल पर मंगलवार को आधिकारिक रूप से इस परियोजना का उद्घाटन किया गया। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री कौशिक राय ने परियोजना का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के ओएसडी हेमंत चौधरी, गुवाहाटी महानगर निगम के मेयर मृगेन शरनिया, उपमेयर स्मिता राय और संबंधित क्षेत्र के पार्षद उपस्थित थे।
इस परियोजना की लागत का वहन 15वें वित्त आयोग के स्वच्छ भारत मिशन और छठे असम राज्य वित्त आयोग द्वारा आवंटित फंड से किया गया है। इसके अंतर्गत आदाबाड़ी और मालीगांव-गुवाहाटी महानगर निगम के 1 से 15 नंबर वार्डों के कचरा प्रबंधन बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा।
इस परियोजना का एक मुख्य आकर्षण दैनिक 150 मीट्रिक टन कचरा प्रसंस्करण क्षमता वाला रिफ्यूज ट्रांसफर स्टेशन है। यहां महानगर के विभिन्न क्षेत्रों से एकत्र किए गए कचरे को इकट्ठा करके हाइड्रोलिक कॉम्पैक्टर की मदद से दबाकर उसका आयतन कम किया जाएगा। बाद में विशेष रूप से सील किए गए कंटेनरों में कचरे का परिवहन किया जाएगा। इस पद्धति से कचरे की मात्रा लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक कम की जा सकेगी। इससे कचरे का परिवहन और आगे का प्रबंधन और अधिक आसान तथा प्रभावी होगा।
दूसरी ओर, दैनिक 100 मीट्रिक टन कचरा प्रसंस्करण क्षमता वाली मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी में आधुनिक यांत्रिक पद्धति से सूखे कचरे को अलग किया जाएगा। इसके माध्यम से प्लास्टिक, कागज, धातु सहित विभिन्न पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग करके बेलिंग के माध्यम से रीसाइक्लिंग उद्योगों को भेजा जाएगा।
इस परियोजना के शुरू होने से महानगर में कचरा संग्रह, परिवहन, छंटाई और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया और अधिक सुसंगत होने की उम्मीद है। विशेष रूप से आदाबाड़ी और मालीगांव क्षेत्र के कचरा प्रबंधन में यह बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसके अलावा परियोजना के तहत आवश्यक मशीनरी और उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना, प्रायोगिक संचालन और पूरी तरह से चालू करने की व्यवस्था रखी गई है। साथ ही अगले पांच वर्षों के लिए वार्षिक रखरखाव की जिम्मेदारी भी परियोजना में शामिल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / देबजानी पतिकर

