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असम की बदलती जनसंख्या संरचना पर विशेष व्याख्यान आयोजित

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असम की बदलती जनसंख्या संरचना पर विशेष व्याख्यान आयोजित


असम की बदलती जनसंख्या संरचना पर विशेष व्याख्यान आयोजित


गुवाहाटी, 29 मार्च (हि.स.)। गुवाहाटी के भरलुमुख स्थित आलोक भवन के संघ साधक मधुकर लिमये सभागार में रविवार अपराह्न पूर्वोत्तर भारत अध्ययन समूह की पहल पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय “असम की बदलती जनसंख्या संरचना : अवैध घुसपैठ और सुरक्षा, समाज तथा सांस्कृतिक पहचान पर उसका प्रभाव” रखा गया था।

इस व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में मुंबई स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज की जनस्वास्थ्य एवं मृत्यु दर विशेषज्ञ प्रोफेसर नंदिता सैकिया उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन अध्ययन समूह की सदस्य अरूपा बरठाकुर ने किया।

अपने संबोधन में प्रोफेसर सैकिया ने असम की जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलावों के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से राज्य में अवैध प्रवासन के इतिहास, वर्तमान में घुसपैठ के अनुमानित आंकड़ों, इसके स्थापित होने की प्रक्रिया, सामाजिक प्रभाव, संभावित खतरों और असमिया समाज की भूमिका जैसे विषयों पर तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत की।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से असम प्रवासियों का प्रदेश रहा है और स्वतंत्रता पूर्व काल से लेकर वर्तमान समय तक यहां प्रवासन के कारणों और प्रक्रियाओं ने व्यापक असर डाला है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल असम या पूर्वोत्तर क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है।

प्रोफेसर सैकिया ने अपने वक्तव्य में कहा कि अवैध घुसपैठ के कारण राज्य में सामाजिक और सांस्कृतिक असंतुलन उत्पन्न हो रहा है तथा स्थानीय भाषा और संस्कृति पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए शुद्ध एनआरसी की आवश्यकता पर जोर देते हुए सरकार और नागरिक समाज की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम के अंत में गौहाटी विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग की प्रमुख प्रोफेसर कल्पना बोरा ने धन्यवाद् ज्ञापन किया, जबकि अध्ययन समूह के सदस्य चिन्मय किशोर ने शांति मंत्र का पाठ किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश