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अंबुबासी महायोग की निवृत्ति के बाद श्रद्धालुओं के लिए खुला कामाख्या मंदिर का कपाट

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अंबुबासी महायोग की निवृत्ति के बाद श्रद्धालुओं के लिए खुला कामाख्या मंदिर का कपाट


गुवाहाटी, 26 जून (हि.स.)। पूर्वोत्तर के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में एक अंबुबासी मेला के दौरान गुवाहाटी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। गुवाहाटी के नीलाचल पहाड़ पर स्थित 51 शक्तिपीठों में प्रमुख मां कामाख्या धाम में आज मां कामाख्या का दर्शन एवं आराधना के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है।

उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष कामाख्या धाम में अंबुबासी मेला का आयोजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि मां वर्ष में एक बार रजस्वला होती हैं। जिसे अंबुबासी महायोग के रूप में भी माना जाता है। अंबुबासी महायोग तंत्र साधना के लिए सबसे प्रमुख योग माना जाता है।

ज्ञात हो कि बीते 22 जून को अंबुबासी महायोग के आरंभ होने के साथ ही मंदिर का कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद कर दिया गया था। अंबुबासी महायोग की निवृत्ति बीती मध्य रात्रि को 12 बजकर 02 मिनट एवं 13 सेकेंड पर हुई। इसके बाद मंदिर के पुजारी द्वारा विधि-विधान के साथ साफ-सफाई एवं पूजा-अर्चना के बाद आज सुबह माता रानी के दर्शन के लिए मंदिर का कपाट खोला गया।

माता रानी के दर्शन के लिए श्रद्धालु बीती रात से ही लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। जबकि कई श्रद्धालुओं के अनुसार, वे आज तड़के 3 बजे से माता रानी की पूजा-दर्शन के लिए कतार में खड़े हैं।

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, असम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद दिलीप सैकिया भी मंदिर के कपाट खुलने के बाद दर्शन के लिए पहुंचे थे। उन्होंने इस मौके पर अंबुबासी मेला के सफल संचालन के लिए मंदिर प्रबंधन कमेटी, राज्य सरकार, जिला प्रशासन एवं समाजसेवी संगठनों की प्रशंसा की।

उल्लेखनीय है कि असम सरकार, कामरूप (मेट्रो) जिला प्रशासन एवं मंदिर परिचालन समिति ने इस बार अंबुबासी मेले में 8 लाख से अधिक भक्तों के अंबुबासी मेले में हिस्सा लेने का अनुमान जताया था। मंदिर परिचालन समिति के दोलोई समाज का कहना है कि अंबुबासी मेले में श्रद्धालुओं की संख्या 8 लाख से भी अधिक देखी गयी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय