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होर्मुज संकटः रास्ते कई लेकिन हरेक की अपनी कीमत

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होर्मुज संकटः रास्ते कई लेकिन हरेक की अपनी कीमत


होर्मुज संकटः रास्ते कई लेकिन हरेक की अपनी कीमत


- अमरेश द्विवेदी

ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल के सैन्य टकराव ने वैश्विक व्यापार के निर्बाध प्रवाह के लिए जलमार्गों के महत्व को उजागर किया है। आज की परस्पर जुड़ी हुई दुनिया में समुद्री मार्ग सिर्फ पानी के रास्ते नहीं हैं- ये वैश्विक अर्थव्यवस्था की धमनियां हैं। दुनिया का लगभग 80 प्रतिशत व्यापार (मात्रा के हिसाब से) और 70 प्रतिशत से अधिक (मूल्य के हिसाब से) समुद्री परिवहन पर निर्भर करता है। ऐसे में कुछ संकरे लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग हैं जिन्हें चोक प्वॉइंट्स कहा जाता है और ये पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

हाल के वर्षों में विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और इसके बंद होने की स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये जलमार्ग कितने संवेदनशील और महत्वपूर्ण हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद हो जाने के बाद जिससे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है- दुनिया को ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, स्वेज नहर, पनामा नहर और मलक्का जलसंधि जैसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में किसी भी तरह की रुकावट से व्यापार में भारी देरी हो सकती है। इसके चलते शिपिंग कंपनियों को केप ऑफ़ गुड होप जैसे लंबे रास्तों का चुनाव करना पड़ता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ जाती है।

आईए, जानते हैं दुनिया भर के सामानों के परिवहन के लिए 10 सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों काे, जब ऐसे मार्ग बाधित होते हैं तो न केवल ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है बल्कि वैश्विक महंगाई, आपूर्ति संकट और भू-राजनीतिक तनाव भी बढ़ जाते हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य : यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा जलमार्ग है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% यहीं से गुजरता है। यहां से प्रतिदिन 20 से 21 मिलियन बैरल तेल निकलता है। इसकी सबसे संकरी चौड़ाई मात्र 39 किमी है, जिससे यह अत्यंत संवेदनशील बन जाता है। वैश्विक तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के पांचवें हिस्से के लिए एकमात्र समुद्री निकास मार्ग का काम करता है। यह जलसंधि वर्तमान में ईरान और उसके पड़ोसी खाड़ी देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख केंद्र बनी हुई है। अगर यह मार्ग बंद हो जाए तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आना तय है।

बाब अल-मंडेब : यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के लिए प्रवेश द्वार का काम करता है। यह मार्ग वैश्विक व्यापार के लगभग 12% हिस्से को संभालता है। सबसे संकरी चाैड़ाई 32 किमी है और यहां से प्रतिदिन 4 मिलियन बैरल तेल निकलता है। यमन में चल रहे संघर्ष और हूती विद्रोहियों के हमलों ने इस क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो जहाजों को केप ऑफ गुड होप से लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।

स्वेज नहर : सिनाई प्रायद्वीप को बाकी मिस्र से अलग करती है और भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है। यहां से प्रति दिन 50 लाख बैरल तेल निकलता है। इसकी सबसे संकरी जगह मात्र 225 मीटर (740 फ़ीट) है। 1869 में खुली स्वेज़ नहर, एशिया और यूरोप के बीच सफ़र के लिए एक बहुत ज़रूरी छोटा रास्ता है। इससे लगभग 8,900 किमी की दूरी कम हो जाती है और अफ़्रीका के चारों ओर से घूमकर जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। साल 2021 में एवरग्रीन मरीन द्वारा चलाया जा रहा एक बड़ा कंटेनर जहाज नहर में फँस गया था, जिससे वैश्विक व्यापार छह दिनों तक ठप हो गया। इस घटना ने दिखाया कि एक छोटे हिस्से भी कितना बड़ा आर्थिक प्रभाव डाल सकते हैं।

तुर्की जलडमरूमध्य : यह इस्तांबुल और डार्डानेल्स से होकर गुज़रता है और काला सागर को भूमध्य सागर से जोड़ता है। अपने सबसे संकरी जगह पर 700 मीटर है और यहां से प्रतिदिन 30-40 लाख बैरल तेल निकलता है। बोस्फोरस और डार्डानेल्स से मिलकर बना तुर्की जलडमरूमध्य, काला सागर और भूमध्य सागर के बीच एकमात्र समुद्री रास्ता है। यह पूर्वी यूरोप के ज़्यादातर हिस्से को बाकी दुनिया से जोड़ता है और तेल और प्राकृतिक गैस के आने-जाने में मदद करता है, जो दुनिया भर के ऊर्जा बाज़ारों के लिए बहुत जरूरी हैं।

जिब्राल्टर जलडमरूमध्य : स्पेन-मोरक्को के बीच है जाे अटलांटिक महासागर को भूमध्य सागर से जोड़ता है। इसकी चाैड़ाई 13 किमी की है और यहां से प्रतिदिन 50-60 लाख बैरल तेल निकलता है। यह जलडमरूमध्य, अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर के बीच एकमात्र प्राकृतिक समुद्री रास्ता है। स्वेज़ नहर की ओर जाने वाले सभी जहाज़ों के लिए यह पश्चिमी प्रवेश द्वार है। इस जलडमरूमध्य का एक लंबा इतिहास रहा है, जहाँ यह धरती के सबसे ज़्यादा विवादित और घेराबंदी वाले समुद्री रास्तों में से एक रहा है।

डेनिश जलडमरूमध्य : यह डेनमार्क को स्वीडन से अलग करता है और बाल्टिक सागर को उत्तरी सागर से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई 3.7 किमी है और यहां से प्रतिदिन 50 लाख बैरल तेल निकलता है। बाल्टिक बंदरगाहों से दुनिया भर में रूसी तेल भेजने का यह मुख्य रास्ता है। ये संकरे डेनिश जलडमरूमध्य बहुत ज़रूरी समुद्री रास्ते हैं, जो जहाज़ों के बड़े पैमाने पर आने-जाने में मदद करते हैं और उत्तरी यूरोप को दुनिया भर के बाज़ारों से जोड़ते हैं।

मलक्का जलडमरूमध्य : मलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया के बीच माैजूद यह हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ता है। इसकी चौड़ाई 2.8 किमी है और यहां से प्रति दिन 23 मिलियन बैरल तेल निकलता है। धरती के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक, इस जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 40 प्रतिशत व्यापार और चीन का 80 प्रतिशत तेल आयात गुजरता है। यह दुनिया का सबसे व्यस्त चोकप्वॉइंट है, जहां से होर्मुज जलडमरूमध्य की तुलना में अधिक मात्रा में तेल का परिवहन होता है।

ताइवान जलडमरूमध्य : दुनिया के सेमीकंडक्टर इसी महत्वपूर्ण चोकप्वॉइंट से होकर गुजरते हैं। इसकी मुख्य भूमि चीन को ताइवान से अलग करती है और दक्षिण चीन सागर को पूर्वी चीन सागर से जोड़ती है। इसकी चाैड़ाई 130 किमी और मूल्य के आधार पर यह सालाना दुनिया के 20 प्रतिशत से अधिक समुद्री व्यापार को संभालता है। इस जलडमरूमध्य में ताइवान और चीन के बीच बढ़ता तनाव देखा गया है, जिसकी पहचान दोनों पक्षों द्वारा बढ़ाए जा रहे सैन्य टकरावों और नौसैनिक अभ्यासों से होती है।

पनामा नहर : यह नहर पनामा से होकर गुजरती है, जो कैरिबियन सागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है। इसकी सबसे संकरी चौड़ाई मात्र 222 मीटर है और यहां से प्रतिदिन 20 से 30 लाख बैरल तेल निकलता है। साल 1914 में खोली गई इस नहर में एक लॉक सिस्टम है, जो जहाज़ों को समुद्र के अलग-अलग स्तरों के बीच ऊपर-नीचे करता है। यह अमेरिका के कुल कंटेनर ट्रैफ़िक के 40 प्रतिशत हिस्से के लिए एक रास्ता है। यह ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक अहम कड़ी का काम करती है, और अमेरिका से एशिया जाने वाले 95 प्रतिशत से ज़्यादा लिक्विफ़ाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के निर्यात को संभालती है।

केप ऑफ गुड होप : दक्षिण अफ़्रीका में केप प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी सिरे पर है और यहां से प्रति दिन 90 लाख बैरल तेल निकलता है। स्वेज नहर वाले रास्ते की तुलना में, यह रास्ता एशिया और यूरोप के बीच 5550 से 7400 किमी काे जोड़ देता है जाे यात्राओं में 10 से 14 दिन लगता है और साथ ही बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से भी बचाता है। हाल के समय में, इस रास्ते को वैश्विक व्यापार के लिए एकमात्र व्यावहारिक गलियारे के तौर पर अहमियत मिली है, जो मध्य पूर्व को बाईपास करता है।

इन सभी जलमार्गों की एक समान विशेषता है-रणनीतिक रूप से इनका संवेदनशील होना। ये संकरे हैं लेकिन इनका महत्व अत्यधिक है। एक छोटी-सी बाधा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकती है। जिससे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, वस्तुओं की कमी होती है और आर्थिक अस्थिरता पैदा होती है। आज के भू-राजनीतिक माहौल में जहां संघर्ष और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। दुनिया के देश अब वैकल्पिक मार्गों, ऊर्जा स्रोतों और सप्लाई चेन के विविधीकरण पर जोर दे रहे हैं।

(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी