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आर्थिक मोर्चे पर आत्मविश्वास से आगे बढ़ता भारत

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आर्थिक मोर्चे पर आत्मविश्वास से आगे बढ़ता भारत


- डॉ. मयंक चतुर्वेदी

दुनिया की अर्थव्यवस्था जब अनिश्चितताओं, राजनीतिक तनावों और सुस्त मांग के दौर से गुजर रही हो, तब भारत की तस्वीर निश्चित ही उत्साह से भर देती है। मजबूत घरेलू मांग, निवेश के प्रति सकारात्मक माहौल, बढ़ता औद्योगिक भरोसा जिसमें कि सुधारों की निरंतरता भी लगातार बनी हुई है, ये सभी कारण आज भारत को आर्थिक मोर्चे पर एक आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित करते हैं। वस्‍तुत: भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई का ताजा बिजनेस आउटलुक सर्वे इसी सशक्त और आशाजनक परिदृश्य की पुष्टि कर रहा है।

दरअसल, भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल और गतिशील घरेलू बाजार है। देखा जाए तो इस वक्‍त वैश्विक स्तर पर निर्यात आधारित अर्थव्यवस्थाएं दबाव महसूस कर रही हैं, दूसरी ओर भारत है जहां आंतरिक मांग विकास का मजबूत आधार तैयार करती है। यही कारण है कि भारत में उद्योग जगत का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और कंपनियां भविष्य को लेकर आशावादी नजर आती हैं। इसीलिए ही इस वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में सीआईआई का बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स बढ़कर 66.5 पर जा पहुंचा है। यह पिछले पांच तिमाहियों का उच्चतम स्तर है।

यहां उल्‍लेखित कर दें कि किसी भी सूचकांक में 50 से ऊपर का आंकड़ा इस दिशा में सकारात्मकता का संकेत है। ऐसे में 66.5 का स्तर इतना बताने के लिए पर्याप्‍त है कि भारतीय उद्योग सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके सामने आए आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में लगभग दो तिहाई कंपनियों ने मजबूत मांग दर्ज की। वहीं चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 72 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि आने वाले समय में मांग और बढ़ेगी। वहीं, सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में निवेश बढ़ना इस बात का प्रमाण है कि अर्थव्यवस्था में विश्वास का माहौल है।

वस्‍तुत: सीआईआई सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि कंपनियां अपनी हायरिंग और निवेश योजनाओं को आगे बढ़ाना इसलिए भी चाह रही हैं क्‍योंकि जहां एक ओर विश्‍व के कई देशों में आज ऊंची ब्याज दरों, महंगाई के दबाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधाओं का सामना देखा जा रहा है। वहीं, भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर और मजबूत दिखाई देती है। यदि इसके पीछे के कारणों को देखें तो इसका प्रमुख कारण मजबूत घरेलू सुधार, नीतिगत स्थिरता और सरकार तथा उद्योग के बीच निरंतर संवाद का सतत प्रक्रिया के रूप में चलते रहना है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी भारत की विकास दर को लेकर सकारात्मक हैं और आने वाले वर्षों में भारत के 6 से 7 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

अभी इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने बोला भी कि भारत आज दुनिया के लिए एक प्रमुख ग्रोथ इंजन की तरह काम कर रहा है। आईएमएफ के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की डायरेक्टर जूली कोज़ैक का कहना है कि भारत की तीसरी तिमाही की आर्थिक ग्रोथ उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत रही है। जब कई बड़े देश स्लो ग्रोथ या मंदी के खतरे से जूझ रहे हैं, तब भारत की अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है। आईएमएफकी आर्टिकल आईवी स्टाफ रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.6 प्रतिशत रह सकती है। इस ग्रोथ का सबसे बड़ा कारण बताया गया है- मजबूत घरेलू खपत। सरल शब्दों में कहें तो भारत के लोग खर्च कर रहे हैं, बाजार चल रहे हैं, उद्योग सक्रिय हैं और यही अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहा है।

आईएमएफ अगले हफ्ते अपना विश्व आर्थिक आउटलुक (डब्ल्यूईओ) अपडेट जारी करने वाला है। इस रिपोर्ट में भारत की नई ग्रोथ दर, अन्य प्रमुख देशों की आर्थिक स्थिति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की ताजा तस्वीर शामिल होगी। आईएमएफ का कहना है कि इस रिपोर्ट के बाद यह और साफ हो जाएगा कि हाल के आर्थिक आंकड़ों ने भारत और दुनिया की अर्थव्यवस्था को किस तरह प्रभावित किया है।

अत: निष्‍कर्ष यही है कि सीआईआई का बिजनेस आउटलुक सर्वे यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत का घरेलू आर्थिक मोर्चा मजबूत, संतुलित और आत्मविश्वास से भरा हुआ है। मजबूत मांग, बढ़ता निवेश, सुधारों की निरंतरता और नवाचार पर फोकस ने भारत को एक उज्ज्वल आर्थिक भविष्य की ओर अग्रसर किया है। यदि सरकार और उद्योग मिलकर इसी दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे तब यह तय है कि आने वाले वर्षों में भारत इसी तरह से तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। वह आगे भी समावेशी और टिकाऊ विकास का वैश्विक उदाहरण भी प्रस्तुत करता रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी