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महिलाएँ लिख रहीं हैं विकास की इबारत

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महिलाएँ लिख रहीं हैं विकास की इबारत


महिला समानता दिवस (26 अगस्त) पर विशेषडॉ. लोकेश कुमार

भारत में सल्तनत काल से पहले महिलाओं को पुरुषों के समान कई अधिकार प्राप्त थे। वे सभा और समितियों में अपने विचार रखती थीं लेकिन बाद के दौर में महिलाओं की स्थिति कमजोर होती गई और उन्हें धीरे-धीरे पुरुष प्रधान समाज में वस्तु के समान समझा जाने लगा। आजादी के बाद महिला को भी पुरूष के समान अधिकार दिए जा रहे हैं। ऐसा पहले नहीं था क्योंकि महिला को पुरूष के समान दर्जा नहीं देकर उसे केवल दासी के रूप में देखा जाता था।

सन 1920 में अमेरिकी संविधान के 19वें संशोधन को लागू किए जाने के बाद ही महिला को पुरूष के समान दर्जा देते हुए उन्हें वोट देने का अधिकार प्रदान किया गया। इसी की याद में 26 अगस्त को महिला समानता दिवस मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं को उनके नागरिक अधिकार और वोट देने की कानूनी ताकत मिलने की ऐतिहासिक सफलता का जश्न मनाया जाता है। यह उन सभी साहसी महिलाओं और उनके संघर्षों को सम्मान देता है, जिन्होंने दशकों तक समानता की लड़ाई लड़ी। यह दिन हमें यह सोचने को मजबूर करता है कि समाज में महिलाओं को और कौन-से अधिकार मिलने बाकी हैं।

यह कार्यस्थल, शिक्षा और राजनीति में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को खत्म करने और आगे की प्रगति के लिए प्रेरित करता है। भारतीय संविधान में 73वां, 74वां संविधान संशोधन करके महिलाओं को पंचायती राज और नगर निकाय में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया। जिससे पंचायत राज और नगर निकाय में महिलाओं को जनप्रतिनिधि होने का मौका मिला। वह पुरूष समाज के सामने महिलाओं का प्रतिनिधित्व होना बहुत मुश्किल है। इसलिए पंचायती राज और नगर निकाय में आरक्षण व्यवस्था महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है। महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत यह कानून लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देता है।

सितंबर, 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (128वां संविधान संशोधन विधेयक) संसद के दोनों सदनों से ऐतिहासिक बहुमत के साथ पारित कराया गया । यह प्रावधान आगामी परिसीमन और चुनावों की प्रक्रिया के अनुसार लागू होने की दिशा में आगे बढ़ाया गया है। महिलाओं को सशक्त और सुरक्षित बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार प्रदान किए गए हैं। जिनमें महिलाओं को 10 महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान किए गए हैं।

समान वेतन का अधिकार समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, महिलाओं को पुरुषों के समान काम के लिए समान वेतन पाने का अधिकार प्रदान किया गया है लेकिन आज भी निजी कम्पनियों में महिलाओं को पुरूष से कम ही वेतन दिया जाता है।

मातृत्व लाभ का अधिकारः मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत गर्भवती महिलाओं को बच्चे के जन्म से पहले और बाद में 26 सप्ताह तक के सवैतनिक (पेड) अवकाश का भी अधिकार प्रदान किया गया है।

कार्यस्थल पर सुरक्षा कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम महिलाओं को कार्यालयों या कार्यस्थलों पर किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रदान की गई है। लेकिन कानून बनने के बाद भी महिलाओं कार्यालयों में यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकारघरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और मौखिक हिंसा से सुरक्षा प्रदान करता है। घरेलू हिंसा में महिलाओं को शिकार बनाया जाता है।

पैतृक सम्पत्ति में अधिकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के संशोधन के अनुसार, बेटियों को भी बेटों की तरह पैतृक संपत्ति में समान अधिकार प्रदान किया गया है लेकिन महिलाएं अपना हक मांग लेती हैं तो भाइयों द्वारा उनके सम्मान में कमी कर दी जाती है।

मुफ्त कानूनी सहायता महिलाओं को अपनी न्याय की लड़ाई के लिए बिना किसी आर्थिक बाधा के मुफ्त वकील और कानूनी सहायता पाने का अधिकार प्रदान किया गया है।

महिलाओं को गिरफ्तारी से जुड़े विशेष संरक्षणः कानून के अनुसार, किसी भी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।

जीरो एफआईआर दर्ज कराने का अधिकारकोई भी महिला किसी भी पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है, भले घटना किसी अन्य क्षेत्र में क्यों न हुई हो। क्योंकि महिला को यह अधिकार दिया गया है कि जहां उसके साथ घटना घटी है, वह उस थाना क्षेत्र में अधिकार में रिपोर्ट दर्ज कराने से मुक्ति मिल गई है। वहीं, कहीं अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती है।

पहचान गुप्त रखने का अधिकारयौन उत्पीड़न या बलात्कार पीड़ित महिला की पहचान को कानूनी रूप से पूरी तरह गुप्त रखने का अधिकार प्रदान किया गया है। उसका नाम और फोटो मीडिया में प्रकाशित नहीं कर सकते हैं।

पुलिस थाने में पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जाना आपराधिक प्रक्रिया के तहत पुलिस किसी महिला को पूछताछ के लिए थाने में हाजिर होने के लिए बाध्य नहीं कर सकती, पूछताछ उसके निवास स्थान पर होगी।

महिलाओं को समानता के लिए निरंतर संघर्ष अमेरिकी महिलाओं को वोट देने का अधिकार तो मिल गया था लेकिन उन्हें रोजगार और शिक्षा के साथ-साथ अन्य विषयों पर कई तरह की असमानताओं का सामना करना पड़ा। 26 अगस्त, 1970 को राष्ट्रीय महिला संगठन की सह-संस्थापक, कार्यकर्ता बेट्टी फ्रीडन ने समानता के लिए देशभर में महिलाओं के समूह बनाकर हड़ताल को अंजाम दिया। उस समय, महिलाओं की समानता हड़ताल संयुक्त राज्य अमेरिका में लैंगिक समानता के लिए सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन माना जाता है। देशभर के नब्बे से अधिक शहरों में एक लाख से अधिक महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विरोध प्रदर्शन के साथ ही इन समूहों ने कई ऐसी घटनाओं का अंजाम दिया। जिससे महिलाओं के अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में कामयाबी मिली। न्यूयॉर्क शहर में फिफ्थ एवेन्यू पर लगभग पचास हज़ार महिलाओं ने एक साथ मार्च निकाला।

महिलाओं के एक समूह ने न्यूयॉर्क में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी पर चढ़कर उसके शिखर पर बैनर भी लटका दिए। उन बैनरों पर लिखा था, ”विश्व की महिलाएं एकजुट हों“ और ”समानता के लिए 26 अगस्त को मार्च करें।“ महिलाओं के एक समूह ने अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज की घड़ी रोकने पर मजबूर कर दिया, जबकि दूसरे समूह ने बाहर ”हम अब और बकवास बर्दाश्त नहीं करेंगे“ लिखे बैनरों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। ये ऐसी महत्वपूर्ण घटनाएं हैं जो महिलाओं को अपनी आजादी दिलाने में कामयाब नजर आई। इसी दिन, महिलाओं के एक समूह ने महिला स्कूल प्रशासकों के लिए समान वेतन पाने के लिए न्यूयॉर्क सिटी बोर्ड ऑफ एजुकेशन के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया था।

यह मुकदमा लगभग दस साल तक अदालतों में चला लेकिन अंततः महिलाएं पुरूष प्रधानाचार्यों के लिए वेतन वृद्धि हासिल करने में सफल रहीं। कई लोगों ने इन घटनाओं पर ध्यान दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने उस दिन शहर भर में आयोजित कई घटनाओं को कवर किया और महिला आंदोलन पर अपना पहला लेख प्रकाशित किया। 1971 में, न्यूयॉर्क की डेमोक्रेट प्रतिनिधि बेला अब्ज़ुग ने 26 अगस्त को महिला समानता दिवस के रूप में नामित करने के लिए एक विधेयक पेश किया गया। विधेयक पारित हो गया। इसके बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका में कई महिला समूहों द्वारा इस दिन महिला समानता दिवस प्रतिवर्ष मनाया जाता है।

इनमें से कई समूह महिलाओं के मताधिकार और 1970 की महिला समानता हड़ताल की याद में विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इक्कीसवीं सदी में भी, संयुक्त राज्य अमेरिका में महिलाओं को राजनीति, शिक्षा, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में लैंगिक असमानता का सामना करना पड़ता है। उनके साथ भेदभाव किया जाता है। उन्हें स्वास्थ्य सेवा, गरीबी, हिंसा, सुरक्षा और प्रजनन अधिकारों से सम्बंधित संघर्षों का सामना करना पड़ रहा है।

महिला समानता दिवस उन पीढ़ियों की महिलाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता है जिन्होंने मताधिकार के लिए लंबे संघर्ष में विरोध, बलिदान और कठिनाइयों का सामना किया। यह सुनिश्चित करता है कि उनके साहस, दृढ़ता और संकल्प को स्थापित किया जाए और उन आंदोलन के इतिहास को याद रखा जाए और मान्यता दी जाए। हमें यह याद दिलाता है कि समानता की खोज 19वें संशोधन के साथ समाप्त नहीं हुई। महिला समानता दिवस हमें अब तक हुई प्रगति और पूर्ण समानता प्राप्त करने के लिए शेष कार्यों पर विचार करने के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा।(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित